Indian Military Academy Dehradun: भारतीय सेना की वीरता और अनुशासन का पर्याय माने जाने वाले इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), देहरादून ने अपने 93 साल के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखा है। हाल ही में आयोजित पासिंग आउट परेड (POP) में महाराष्ट्र के कोल्हापुर की साई जाधव ने इतिहास रच दिया। वह इस प्रतिष्ठित संस्थान से पास आउट होने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। साई जाधव अब प्रादेशिक सेना (Territorial Army) में लेफ्टिनेंट के रूप में अपनी सेवाएँ देंगी।
यह उपलब्धि न केवल भारतीय सेना में बढ़ती महिला भागीदारी का प्रतीक है, बल्कि देश के उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी है जो सेना में ऑफिसर बनने का सपना देखते हैं।
क्या है इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA)?
देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी भारतीय सेना के उन सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है, जहाँ भविष्य के सैन्य नेतृत्व को तराशा जाता है। यहाँ कैडेट्स को न केवल युद्ध कला सिखाई जाती है, बल्कि उन्हें मानसिक, नैतिक और शारीरिक रूप से इतना सक्षम बनाया जाता है कि वे कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी देश का नेतृत्व कर सकें।
IMA का गौरवशाली इतिहास
IMA की स्थापना 1 अक्टूबर 1932 को हुई थी। शुरुआत में यहाँ केवल 40 कैडेट्स का एक छोटा बैच ट्रेनिंग के लिए आया था, जिसे ‘पायनियर्स’ कहा गया।
- विकास क्रम- समय के साथ इस एकेडमी का विस्तार हुआ और आज इसकी क्षमता लगभग 1200 कैडेट्स की है।
- नाम में बदलाव- वर्ष 1950 में इसे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के साथ जोड़ा गया था, लेकिन 1960 में इसे पुनः इसका मूल नाम ‘इंडियन मिलिट्री एकेडमी’ दिया गया।
- योगदान- पिछले 93 वर्षों में इस संस्थान ने देश को 67,000 से अधिक जांबाज सैन्य अधिकारी दिए हैं, जिन्होंने कई युद्धों और शांति मिशनों में अपना लोहा मनवाया है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य और स्वरूप
IMA में प्रशिक्षण का मुख्य मंत्र है- “वीरता और विवेक”। यहाँ कैडेट्स को ‘सज्जन और योद्धा’ (Gentlemen Cadets) के रूप में तैयार किया जाता है।
- शारीरिक और मानसिक मजबूती- कैडेट्स को कड़े अनुशासन और कठिन शारीरिक व्यायाम के दौर से गुजरना पड़ता है।
- नेतृत्व क्षमता (Leadership)- उन्हें त्वरित निर्णय लेने और टीम का नेतृत्व करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
- नैतिक मूल्य- देशप्रेम, आत्म-अनुशासन और साहस उनके जीवन का अभिन्न अंग बन जाते हैं।
- युद्ध कला- यहाँ आधुनिक हथियारों के संचालन, रणनीति और सैन्य नियमों की विस्तृत जानकारी दी जाती है।
इतिहास रचने वाली पहली महिला
इस वर्ष की पासिंग आउट परेड कई मायनों में खास रही। कुल 491 कैडेट्स में से साई जाधव का पास आउट होना आकर्षण का केंद्र रहा। प्रादेशिक सेना (Territorial Army) में लेफ्टिनेंट बनने वाली साई ने साबित कर दिया कि साहस और दृढ़ संकल्प की कोई सीमा नहीं होती। 93 सालों तक केवल पुरुष अधिकारियों का गढ़ रहे इस संस्थान से एक महिला का निकलना, सेना में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
यदि आप सिविल सेवा या रक्षा परीक्षाओं (जैसे CDS, NDA, AFCAT) की तैयारी कर रहे हैं, तो IMA से जुड़े ये सवाल पूछे जा सकते हैं,
- IMA की स्थापना कब हुई?
(1932)
- IMA कहाँ स्थित है?
(देहरादून, उत्तराखंड)
- संस्थान की पहली महिला अधिकारी कौन हैं?
(लेफ्टिनेंट साई जाधव)
- संस्थान का आदर्श वाक्य क्या है?
(वीरता और विवेक)
Positive Takeaway
इंडियन मिलिट्री एकेडमी केवल एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय सेना की आत्मा है। साई जाधव की सफलता ने इस एकेडमी के गौरव को और बढ़ा दिया है। यह ऐतिहासिक पल आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाएगा कि जब बात राष्ट्र रक्षा की हो, तो जज्बा और योग्यता ही सर्वोपरि होती है।

