Danteshwari Fighters: शक्ति और साहस का प्रतीक!

Danteshwari Fighters: बस्तर की महिला कमांडो यूनिट ‘दंतेश्वरी फाइटर्स’ ने समय और परिस्थितियों की कठोर परीक्षा को पार करते हुए महिला नेतृत्व और साहस का अद्भुत उदाहरण पेश किया है। पहले ये महिलाएं पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर नक्सल विरोधी अभियानों में जाती थीं, लेकिन अब ये अपने दम पर मिशन चलाती हैं और नक्सलियों के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं।

डीआरजी का हिस्सा

यह यूनिट District Reserve Guard (DRG) का हिस्सा है। पहले DRG में सिर्फ पुरुष जवान होते थे, लेकिन समय के साथ छत्तीसगढ़ की संरक्षक देवी मां दंतेश्वरी के नाम पर महिला विंग का गठन किया गया। आज इस यूनिट में 60 से अधिक महिलाएं हैं, जिनमें पूर्व महिला माओवादी, सलवा जुडूम पीड़ित, और स्थानीय ग्रामीण महिलाएं शामिल हैं।

प्रशिक्षण और भूमिकाएँ

Danteshwari Fighters की सभी महिलाएं स्वयंसेवक हैं। इनका प्रशिक्षण न केवल सशस्त्र अभियानों के लिए है, बल्कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा, जनसंपर्क, रोड ओपनिंग, मेडिकल हेल्प और समुदाय में विश्वास निर्माण जैसी गतिविधियों में भी सक्रिय हैं। ,ये महिलाएं

  • नक्सल प्रभावित इलाकों में अग्रिम मोर्चे पर तैनात रहती हैं।
  • जरूरत पड़ने पर अपने साथ AK-47 और पिस्तौल छिपाकर मिशन पर जाती हैं।
  • फील्ड में सुरक्षा बलों के साथ सामंजस्य बनाकर काम करती हैं।
  • ग्रामीण समुदाय और महिला शिक्षा एवं स्वास्थ्य में सक्रिय योगदान देती हैं।

Danteshwari Fighters महिला कमांडो की एक विशेषता यह है कि वे न केवल मिशन पर जाती हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपनी जान की बाज़ी लगाकर साथियों की रक्षा करती हैं।

वीरता की कहानियाँ

दंतेश्वरी फाइटर्स की वीरता की कई कहानियाँ बस्तर के जंगलों में गूँजती हैं। जिसमें से कुछ बेहद खास है,

  • हेड कांस्टेबल सुनैना पटेल, जो गर्भवती होने के बावजूद मिशन में शामिल हुई थीं और रेशमा कश्यप ने कटेकल्याण के जलमपाल में मुठभेड़ में दो माओवादी को मार गिराया।
  • बीजापुर की उसमति, जिन्होंने 15 साल तक नक्सली गतिविधियों में शामिल रहने के बाद सरेंडर किया, अब मोर्चे पर अपने साथियों की सुरक्षा के लिए लड़ रही हैं।
  • मधु पोडियाम और सुंदरी जैसी कमांडो ने अपने परिवार और गांव की सुरक्षा के लिए हथियार उठाए और नक्सलियों के खिलाफ सशक्त भूमिका निभाई।
  • इन मिशनों में कभी-कभी महिलाओं को मौत के डर का सामना करना पड़ता है। सुनैना ने बताया, “यह मौत की मांद में कदम रखने जैसा था, लेकिन हम अंदर गए और मिशन पूरा किया।

सामाजिक और सामुदायिक प्रभाव

Danteshwari Fighters की उपस्थिति से नक्सल प्रभावित इलाकों में ग्रामीण महिलाओं का पुलिस पर विश्वास बढ़ा है। महिलाएं अब खुलकर संवाद करती हैं और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर समाज में बदलाव लाने में योगदान देती हैं।

पूर्व महिला माओवादी भी अब मुख्यधारा में लौटकर नक्सलियों के खिलाफ काम कर रही हैं। महिला दिवस और अन्य अवसरों पर यह यूनिट सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर मनोबल बढ़ाती है और ग्रामीण समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करती है।

दंतेश्वरी फाइटर्स की उपलब्धियां

  • कई नक्सली कमांडरों को मुठभेड़ों में मार गिराया।
  • टीम के सदस्यों को वीरता के लिए आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन मिला।
  • पूर्व नक्सली और पीड़ित महिलाओं को मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिला।
  • नक्सल प्रभावित इलाकों में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण में योगदान।

Positive Takeaway

दंतेश्वरी फाइटर्स न केवल बस्तर संभाग में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता और साहस का प्रतीक हैं, बल्कि यह नक्सलवाद से लड़ाई में निर्णायक और प्रेरक भूमिका निभा रही हैं। शक्ति और निडरता के प्रतीक के रूप में यह यूनिट आज छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गई है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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