CGPSC Prelims 2025: मावा मोदोल के 20 बच्चों ने पास की प्रीलिम्स!

CGPSC Prelims 2025 Result

 कांकेर के 20 युवाओं ने CGPSC प्री किया पास

मावा मोदोल, जिला प्रशासन की खास पहल

CGPSC Prelims 2025 Result: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दूरस्थ अंचलों में जब संसाधनों की कमी प्रतिभाओं का रास्ता रोकने लगती है, तब ‘इच्छाशक्ति’ और ‘सही मार्गदर्शन’ बड़े बदलाव की नींव रखते हैं। उत्तर बस्तर कांकेर जिले में कुछ ऐसा ही कमाल कर दिखाया है जिला प्रशासन की अभिनव पहल ‘मावा मोदोल’ (मेरा मूल मेरा भविष्य) ने।

हाल ही में घोषित CGPSC प्रारंभिक परीक्षा 2025 के परिणामों ने पूरे जिले को गौरवान्वित किया है। इस निःशुल्क कोचिंग संस्थान के मार्गदर्शन में अध्ययनरत 20 छात्र-छात्राओं ने अपनी मेहनत और प्रशासन के सहयोग से सफलता हासिल की है। यह सफलता न केवल उन छात्रों की है, बल्कि उस सोच की भी है जो मानती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगी कोचिंग की मोहताज नहीं होती।

कलेक्टर की पहल, ‘मेरा मूल मेरा भविष्य’

कांकेर कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर की विशेष दूरदृष्टि का परिणाम है कि आज जिले के आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र प्रशासनिक सेवाओं की दहलीज तक पहुँच रहे हैं। ‘मावा मोदोल’ का अर्थ है ‘मेरा मूल मेरा भविष्य’। इस पहल के तहत कांकेर जिला मुख्यालय और भानुप्रतापपुर विकासखंड में उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

अक्सर देखा जाता है कि बस्तर संभाग के छात्र प्रतिभा होने के बावजूद रायपुर या दिल्ली जैसे शहरों की महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते। इसी खाई को पाटने के लिए प्रशासन ने विषय विशेषज्ञों और अनुकूल वातावरण के साथ इस केंद्र की शुरुआत की, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं।

इस बार की पीएससी प्री परीक्षा में सफलता का आंकड़ा काफी उत्साहजनक है। कुल 20 सफल उम्मीदवारों में से 12 विद्यार्थी भानुप्रतापपुर शाखा से हैं, जबकि 08 विद्यार्थी कांकेर शाखा से चयनित हुए हैं।

सफल विद्यार्थियों की सूची

  • भानुप्रतापपुर शाखा- शिल्पा नुरेटी, छबिलता देहारी, भावेश करंगा, रामगुलाल, रजोतिन, राहुल ठाकुर, डेनियल वर्मा, गजेंद्र सोनवानी, लोचन प्रसाद देवांगन, नेहा कोरेटी, दीप मल्लिका चुरेंद्र और कमल राम ठाकुर (नायब तहसीलदार)।
  • कांकेर शाखा- सुभाष नेताम, वीरेंद्र टंडन, प्रतिभा कुंजाम, प्राची वासनीकर, तुषार शेंडे, दिलीप कुमार मार्कण्डेय, नीरज कुमार साहू और विक्रांत।

इनमें से कई छात्र ऐसे हैं जो बेहद सीमित संसाधनों के बीच अपनी तैयारी कर रहे थे। कुछ छात्र तो पहले से ही सेवा में रहते हुए (जैसे कमल राम ठाकुर) अपनी रैंक सुधारने के लिए इस मार्गदर्शन का लाभ ले रहे हैं।

कड़ी मेहनत और प्रशासनिक प्रतिबद्धता

संस्था ने छात्रों को न केवल किताबी ज्ञान दिया, बल्कि ‘टेस्ट सीरीज’ और ‘मेंटरशिप’ के माध्यम से उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाया। जिला पंचायत सीईओ श्री हरेश मण्डावी ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि अब इन सफल छात्रों के लिए ‘मुख्य परीक्षा’ (Mains) की तैयारी हेतु एक विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मुख्य परीक्षा के लिए विषय विशेषज्ञों के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि ये छात्र अंतिम चयन सूची में भी अपना स्थान पक्का कर सकें।

प्रेरणा का स्रोत बनी यह सफलता

कांकेर की यह सफलता छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के लिए भी एक मिसाल है। यह साबित करता है कि यदि सरकार और प्रशासन संवेदनशील हो, तो सुदूर वनांचलों के युवा भी डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी बनने का सपना देख सकते हैं। ‘मावा मोदोल’ सिर्फ एक कोचिंग सेंटर नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की उम्मीद बन गया है जो अपनी जड़ों (मूल) से जुड़े रहकर अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करना चाहते हैं।

कलेक्टर क्षीरसागर ने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा है कि यह तो बस शुरुआत है। जिले की छिपी हुई प्रतिभाओं को तराशने का यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।

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Rishita Diwan

Content Writer

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