Mawli Mela: मावली मेला क्यों है खास, छत्तीसगढ़ में कहां मनाई जाती है?

Mawli Mela: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के ओरछा क्षेत्र में हर साल भव्य रूप से आयोजित होने वाला मावली मेला राज्य के सबसे बड़े लोकोत्सवों में से एक है। यह मेला केवल धार्मिक आयोजन भर नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक मेलजोल का प्रतीक भी है। इस मेले में श्रद्धालु न केवल माता मावली की पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित और प्रदर्शित करते हैं।

श्रद्धा और उल्लास का पर्व

19 से 23 फरवरी 2025 तक आयोजित होने वाले मावली मेले की शुरुआत माता मावली मंदिर में पारंपरिक पूजा-अर्चना और परघाव (देवताओं के स्वागत की परंपरा) से हुई। मेले का मुख्य आकर्षण स्थानीय देवी-देवताओं के प्रतीक स्वरूप डंगई, लाठ, डोली और छत्र के साथ निकाली गई भव्य शोभायात्रा रही, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। मेले के दौरान माता मावली, कोट गुड़ीन, शीतला माता, कोकोड़ी करीन, तेलवाड़ीन माता, कंकालीन माता, सोनकुंवर, भीमादेव जैसे देवताओं की पारंपरिक विधि से पूजा की जाती है।

पारंपरिक अनुष्ठान और भक्ति की अनूठी छटा

मावली मेले में सिरहा, पुजारियों और गायता (पारंपरिक पुजारी वर्ग) द्वारा अनुष्ठानिक पूजाएं की जाती हैं, जिसमें स्थानीय लोग पूरे श्रद्धाभाव से सम्मिलित होते हैं। यह मेला विशेष रूप से आदिवासी समुदाय की आस्था का द्योतक है, जहां गोंड, मुरिया और अन्य आदिवासी समुदायों के लोग अपनी परंपराओं का प्रदर्शन करते हैं। लोकगीतों, पारंपरिक नृत्यों और अनुष्ठानों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलक

मेले में हर दिन शाम को विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें पारंपरिक लोक कलाओं का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिलता है। इस वर्ष के प्रमुख कार्यक्रम इस प्रकार हैं:

  • 20 फरवरी – बस्तर संस्कृति ग्रुप लोक रंग (सिद्धार्थ महाजन)
  • 21 फरवरी – अनुराग शर्मा स्टार नाइट एंड ग्रुप
  • 22 फरवरी – रास परब एंड ग्रुप, जगदलपुर
  • 23 फरवरी – मल्लखंब डांस एकेडमी और नितिन दुबे सुपर स्टार नाइट

इन आयोजनों में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और आदिवासी कलाओं की झलक देखने को मिलेगी।

मेला स्थल पर विविध आकर्षण

मावली मेले में धार्मिक आयोजन के साथ-साथ मीना बाजार, झूले, फैंसी बाजार, मिठाइयों की दुकानें और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के स्टॉल भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं। इन दुकानों पर आदिवासी हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्रों की खरीदारी भी की जा सकती है।

सुरक्षा और सुविधाओं की चाक-चौबंद व्यवस्था

  • मेला स्थल पर सुरक्षा, पेयजल, बिजली और पार्किंग की पूरी व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की गई है।
  • पूरे मेले में पुलिस बल तैनात किया गया है।
  • श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल टैंकर और अस्थायी शौचालयों की व्यवस्था की गई है।
  • हाई-पावर लाइट और जनरेटर लगाए गए हैं ताकि मेले का आयोजन सुचारू रूप से हो सके।
  • यातायात प्रबंधन के लिए विशेष पार्किंग जोन बनाए गए हैं।

संस्कृति और परंपरा का प्रतीक

यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह आदिवासी समाज के सांस्कृतिक एवं सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूती देता है। इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विभिन्न गांवों से श्रद्धालु अपने देवी-देवताओं की लकड़ी की पालकियों में लेकर यात्रा (जात्रा) निकालते हैं और माता मावली की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

ऐतिहासिक आयोजन

मावली मेला केवल धार्मिक आयोजन भर नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का द्योतक है। यह आदिवासी समाज की परंपराओं को जीवंत रखने वाला पर्व है, जहां पीढ़ी दर पीढ़ी लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हैं।

Positive सार

मावली मेला छत्तीसगढ़ की धार्मिक आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत उदाहरण है। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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