Jashpur Rock Paintings: अनोखी है जशपुर की स्टोन एज दुनिया!

  • Jashpur Rock Paintings
  • जशपुर का गढ़पहाड़
  • आदिमानवों के शैलचित्रों में छिपी प्रागैतिहासिक सभ्यता की कहानी

Jashpur Rock Painting: छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अपनी प्राकृतिक वादियों और घने जंगलों के लिए विश्व विख्यात है, लेकिन हाल के दिनों में यहाँ की पहाड़ियों ने इतिहास के कुछ ऐसे पन्ने खोले हैं जो हमें हज़ारों साल पीछे ले जाते हैं। जिले के मनोरा विकासखंड के ग्राम जयमरगा स्थित गढ़पहाड़ की गुफाएं आज पुरातत्वविदों और पर्यटकों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई हैं। यहाँ मिले आदिमकालीन शैलचित्र (Rock Paintings) न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि भारत की प्रागैतिहासिक विरासत का एक अनूठा साक्ष्य पेश करते हैं।

जयमरगा,  प्रकृति और इतिहास का मिलन

ग्राम पंचायत डड़गांव के आश्रित ग्राम जयमरगा की गोद में बसा यह स्थल सड़क मार्ग से आसानी से सुलभ है। गांव से लगभग 300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गढ़पहाड़ की चढ़ाई रोमांच से भरी है। घने जंगलों के बीच छिपी यह प्राकृतिक गुफा आज भी स्थानीय ग्रामीणों के लिए अटूट आस्था का केंद्र है। ग्रामीण यहाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं, अनजाने में ही सही पर उन्होंने इस अमूल्य धरोहर को सदियों से सहेज कर रखा है।

मध्य पाषाण काल की कलात्मक झलक

पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. अंशुमाला तिर्की और श्री बालेश्वर कुमार बेसरा के शोध के अनुसार, यह क्षेत्र आदिमानवों के निवास के लिए आदर्श था। पहाड़, जंगल और पास बहती नदी ने प्राचीन मानव को भोजन, जल और सुरक्षित आश्रय प्रदान किया। गुफा की दीवारों पर उकेरे गए शैलचित्रों को मध्य पाषाण काल (Mesolithic Era) से संबंधित माना जा रहा है। इन चित्रों की कई विशेषताएं हैं,

  • रंगों का चयन- यहाँ मुख्य रूप से लाल और सफेद रंगों का प्रयोग किया गया है। रोचक बात यह है कि यहाँ ‘हेमाटाइट’ पत्थर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिसका उपयोग उस दौर के कलाकार रंग बनाने के लिए करते थे।
  • विषय वस्तु- चित्रों में केवल शिकार के दृश्य ही नहीं, बल्कि उस समय के सामाजिक जीवन की भी झलक मिलती है। इनमें बैल, तेंदुआ, हिरण और विभिन्न रहस्यमयी ज्यामितीय आकृतियाँ शामिल हैं।
  • मानव आकृतियां- इन आकृतियों के माध्यम से उस समय के शिकार करने के तरीकों और सामूहिक रहने की प्रवृत्ति को बखूबी दर्शाया गया है।

पहरेदारी स्थल और प्राचीन हथियार

विशेषज्ञों का मानना है कि गढ़पहाड़ की यह गुफा संभवतः एक ‘वॉच-टावर’ या पहरेदारी स्थल के रूप में इस्तेमाल की जाती थी। ऊँचाई पर स्थित होने के कारण यहाँ से शिकारी वन्यजीवों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखते थे।

उत्खनन और सर्वेक्षण के दौरान यहाँ से कई माइक्रोलिथिक उपकरण (Microlithic Tools) भी प्राप्त हुए हैं। इनमें लुनैट, स्क्रैपर, पॉइंट, ट्रैपेज, साइड स्क्रैपर और ब्लेड जैसे छोटे लेकिन धारदार पत्थर के हथियार शामिल हैं। ये उपकरण प्रमाणित करते हैं कि यहाँ का मानव न केवल कलाकार था, बल्कि तकनीकी रूप से भी अपने युग के अनुसार विकसित था।

संरक्षण की आवश्यकता

जशपुर की यह सांस्कृतिक विरासत आज संरक्षण की बाट जोह रही है। गढ़पहाड़ की गुफाएं पर्यटन की दृष्टि से एक बड़ा केंद्र बन सकती हैं। यदि इस स्थल को सही ढंग से विकसित किया जाए, तो यह न केवल शोधार्थियों के लिए ज्ञान का भंडार साबित होगा, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए इस प्रागैतिहासिक धरोहर को सहेजना समय की मांग है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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