- Balod Tourism
- छत्तीसगढ़ का ‘करकाभाट’
- 5000 साल पुरानी विरासत देखने पहुंचे दक्षिण कोरियाई शोधकर्ता
Balod Tourism: छत्तीसगढ़ की धरती केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्रागैतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के लिए भी दुनिया भर में जानी जाती है। हाल ही में बालोद जिले के ‘करकाभाट’ में स्थित लगभग 5000 वर्ष पुराने महापाषाणीय स्मारकों (Megalithic Sites) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। दक्षिण कोरिया से आए शोधकर्ताओं के एक दल ने इस स्थल का दौरा कर छत्तीसगढ़ की प्राचीन सभ्यता का गहन अध्ययन किया, जो प्रदेश के पर्यटन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
महापाषाण काल का मूक गवाह
बालोद जिले का करकाभाट स्थल उस कालखंड की याद दिलाता है जब मानव समाज ने अपने पूर्वजों की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए विशाल पत्थरों के स्मारक बनाने की अनूठी परंपरा विकसित की थी। पुरातात्विक विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थल लगभग 3000 ईसा पूर्व का है। यहाँ पाए जाने वाले मेनहिर (Menhir), डोलमेन (Dolmen) और पत्थरों के घेरे (Stone Circles) न केवल तत्कालीन अंतिम संस्कार की जटिल रीतियों को दर्शाते हैं, बल्कि यह उस समय की उन्नत सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था का भी प्रमाण हैं।
महानदी घाटी का यह पूरा क्षेत्र पाषाण काल से लेकर महापाषाणीय काल तक के मानव विकास की कड़ियों को आपस में जोड़ता है। यहाँ के पत्थर न केवल इतिहास की गवाही देते हैं, बल्कि तत्कालीन समाज की इंजीनियरिंग और उनकी सामूहिक शक्ति को भी प्रदर्शित करते हैं।
वैश्विक पटल पर बालोद की पहचान
दक्षिण कोरियाई शोधकर्ताओं का यहाँ आना इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत अब सात समंदर पार अपनी चमक बिखेर रही है। इन शोधकर्ताओं ने स्थानीय गाइड यशकांत गढ़े और टोमेश ठाकुर के मार्गदर्शन में यहाँ की संस्कृति, वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व को समझा। विदेशी पर्यटकों और विशेषज्ञों ने इस अनुभव को ‘अद्भुत’ बताते हुए छत्तीसगढ़ की मेहमाननवाजी और यहाँ के अनछुए इतिहास की जमकर सराहना की है।
बालोद इको टूरिज्म के अध्यक्ष सूरज करियारे के नेतृत्व में पिछले पांच वर्षों से जिले की इन अमूल्य धरोहरों को वैश्विक मानचित्र पर लाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर किए गए इन प्रयासों का ही परिणाम है कि आज विदेशी शोधकर्ता इस सुदूर अंचल की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
पर्यटन की संभावनाएं
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के विजन के सकारात्मक परिणाम अब दिखने लगे हैं। उनका मानना है कि करकाभाट जैसे अद्वितीय स्थलों तक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की पहुंच छत्तीसगढ़ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र (Global Tourism Map) पर मजबूती से स्थापित करेगी।
सरकार का मुख्य उद्देश्य इन प्राचीन धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने समृद्ध इतिहास को जान सकें। साथ ही, पर्यटन के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना और छत्तीसगढ़ को एक ‘प्रीमियर टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करना शासन की प्राथमिकता है।
शोध और भविष्य की राह
करकाभाट जैसे महापाषाणीय स्थल केवल पर्यटन का केंद्र ही नहीं हैं, बल्कि ये शोध के लिए एक खुली प्रयोगशाला भी हैं। दक्षिण कोरियाई शोधकर्ताओं की रुचि यह दर्शाती है कि एशिया के विभिन्न हिस्सों में महापाषाणीय संस्कृति के बीच कोई न कोई अंतर्संबंध (Interconnection) रहा होगा। आने वाले समय में इस क्षेत्र में और अधिक अंतरराष्ट्रीय उत्खनन और शोध कार्य होने की संभावना है, जिससे छत्तीसगढ़ के इतिहास के कई नए पन्ने खुल सकते हैं।
ये भी देखें

