स्मार्ट आदतों से निभाएं पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी, जानें गैजेट्स का इस्तेमाल करते हुए कैसे कर सकते हैं कार्बन फुटप्रिंट को कम ?

ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज का सामना पूरी दुनिया कर रहा है। बढ़ता शहरीकरण, पेड़ों की कमी, संसाधनों का अतिदोहन इसकी सबसे बड़ी वजह थी। समय के साथ बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ने भी ग्लोबल वॉर्मिंग और कार्बन फुटप्रिंट की चिंता को बढ़ा दिया है। पर क्या आप ये सोच सकते हैं कि कोई भी एक गैजेट जो आपकी दिनचर्या का सबसे अहम हिस्सा हो उसके बिना आप कैसे रह पाएंगे। उदाहरण के तौर पर मोबाइल फोन या लैपटॉप। लेकिन इनके इस्तेमाल से बढ़ते कार्बन फुटप्रिंट को कम कैसे किया जाए। इसके लिए गैजेट्स के इस्तेमाल को लेकर हमें स्मार्ट होना पड़ेगा। लेकिन इससे पहले जानते हैं कि कार्बन फुटप्रिंट क्या है…

कार्बन फुटप्रिंट

आसान शब्दों में कहें तो हम सभी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कितना प्रदूषण फैलाते हैं, यही हमारा कार्बन फुटप्रिंट कहलाता है। कार्बन फुटप्रिंट का एक बड़ा संबंध हमारी आदतों पर निर्भर करता है भी हैं। गैजेट्स को लेकर हम फुटप्रिंट कैसे कम कर सकते हैं उसके लिए ये कदम उठाए जा सकते हैं। इसे आप गैजेट्स के इस्तेमाल को स्मार्ट हैक के रूप में देख सकते हैं।

फॉलो ट्रिपल आर रूल

‘‘ट्रिपल आर’ का मतलब है रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल। ये छोटा-सा रूल हमारी जिंदगी बदल सकता है। अपनी स्मार्ट लाइफस्टाइल से हम पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकते हैं। ये पर्यावरण के साथ हमारी जेब के लिए भी बेहतर होगा। कुछ भी जरूरी खरीदते समय ये जरूर देखें कि ये कितना लंबा चल सकता है, रियूज किया जा सकता है। यानी कि खरीदी में ‘रिड्यूस’ करें। जब गैजेट बदलने का मन  करे तो उसे अपने घर के किसी सदस्य या किसी जरूरतमंद को दीजिए ताकि वह ‘रियूज’ हो सके। और जब वो फोन या डिवाइस खराब हो जाए तो उसे अथोराइज्ड शोरूम में जाकर ‘रिसाइकल’ करने का प्रोसेस जरूर फॉलो करें।

पॉवर मैनेजमेंट से बनें स्मार्ट

एनर्जी सेविंग फीचर्स का इस्तेमाल हर यूथ को करना चाहिए। इसके अलावा मिड जनरेशन से या फिर ओल्ड जनरेशन को भी गैजेट्स के उन फीचर्स का इस्तेमाल करना सिखाएं जिससे पॉवर मैनेजमेंट हो सके। फोन, लैपटॉप, टीवी में एनर्जी सेवर मोड को हमेशा ऑन कर रखें। इससे टीवी के मामले में स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रहती है। ऐसा करना दो तरह से फायदेमंद हो सकता है। पहला, ब्राइटनेस कम होने के कारण आंखों पर जोर कम पड़ता है और दूसरा, स्क्रीन पर ब्राइटनेस कम होगी तो बिजली की खपत भी कम होगी। बिजली बचाने से कार्बन फुटप्रिंट खुद-ब-खुद ही कम होगा। इसके अलावा अगर लगता है कि अगले कुछ घंटों तक गैजेट की कोई जरूरत नहीं है तो उसे टर्न ऑफ कर दें।

चार्जिंग की अच्छी आदत जरूरी

सबसे पहले इस बात को सुनिश्चित करें कि आप हमेशा क्विक या फास्ट चार्जर का इस्तेमाल कर करें। इसका फायदा होगा कि बिजली की बचत होगी और बिजली बचाने का मतलब है कार्बन फुटप्रिंट कम करना। इसके अलावा हमेशा इस बात को आदत में डालें कि जब भी मोबाइल या दूसरा कोई गैजेट चार्ज हो जाए तो चार्जर को तुरंत अनप्लग कर दें। इससे न केवल बैटरी की लाइफ बढ़ेगी, डिवाइस के फटने का खतरा कम होगा, और कार्बन फुटप्रिंट कम होगा।

इको-फ्रेंडली एक्सेसरीज को कहें हां

इको-फ्रेंडली आजकल न्यू नॉर्मल है। इसीलिए हमेशा ऐसी एक्सेसरीज ही चुनें जो एनर्जी की दक्षता को बढ़ाए। जैसे स्मार्ट पावर स्ट्रिप का इस्तेमाल। स्मार्ट पावर स्ट्रिप उन चीजों को अपने आप डिसेबल कर देगाी, जिनकी फिलहाल जरूरत नहीं होती है। जैसे टीवी को टर्न ऑफ करते हैं तो स्मार्ट स्ट्रिप टीवी से कनेक्टेड कई चीजों जैसे गेम कंसोल, होम थिएटर कम्पोनेंट्स, डीवीडी प्लेयर को डिस्कनेक्ट कर देती है। इसी तरह हमेशा उन केसेस और कवर का चयन करें जो सस्टेनेबल मटेरियल्स से बनाया गया हो।

ई-वेस्ट का हिस्सा ना बनें

हर साल नया गैजेट लेने की आदत खराब है, ये ई-वेस्ट को बढ़ावा देती है। कोशिश करें कि पुराने गैजेट्स को सालों साल चलाएं। ऐसा करके ना सिर्फ कई बार अपनी कमाई फूंकते हैं, बल्कि फीचर के बहाने छोटे-मोटे बदलाव के नाम पर आप ठगे भी जाते हैं, जो पर्यावरण के लिए काफी महंगा साबित होता है। इसीलिए ई-वेस्ट का हिस्सा न बनें।

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Dr. Kirti Sisodia

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