‘फेसवॉच’ टेक्नॉलजी से सुरक्षा होगी सुनिश्चित, पुलिस को मिलेगी मदद, जानें कैसै?

आज के दौर में टेक्नॉलजी की मदद से सुरक्षा के क्षेत्र में कई अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। मोबाइल सर्विलेंस, विडियो कैमरा और न जाने कितने के सुरक्षा के इक्वीपमेंट बाजार में मौजूद हैं। लेकिन बावजूद इसके कई बार चोरी करने वालों की पहचान में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वहीं मोस्ट वॉटेड अपराधी भी पकड़ में नहीं आते हैं। अब इसका हल खोज लिया गया है जिससे सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में पायदा मिलेगा। इस टेक्नॉलजी का नाम है फेसवॉच। ये चोरी होने वाली जगह से सामान चुराने वालों को पहचानकर अलर्ट तो भेजेगा ही साथ ही वॉन्टेड अपराधियों की पहचान भी करेगा।

फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के बारे में

टेक्नोलॉजी में सुधार और लागत में कमी के कारण फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी ज्यादा प्रचलन में है। इसमें समस्या पैदा करने वाले ग्राहकों से लेकर शॉपलिफ्टर्स तक सभी की पहचान आसानी से होती है। लाइव फेशियल रिकग्निशन के इस्तेमाल में ब्रिटेन फिलहाल सबसे आगे है। लंदन व कार्डिफ में पुलिस सड़क पर चलते समय वॉन्टेड अपराधियों की पहचान के लिए इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती है।

फेस आइडेंटिफिकेशन टेक्नोलॉजी हो सकती है गेम चेंजर

बायोमेट्रिक्स एवं सर्विलांस एक्सपर्ट्स ये मानते हैं कि ‘गति, पैमाने, सटीकता व लागत के मामले में फेस आइडेंटिफिकेशन टेक्नोलॉजी गेम चेंजर बन सकती है। फेसवॉच की वॉचलिस्ट लगातार बढ़ी है। स्टोर शॉपलिफ्टर्स और संदेहास्पद ग्राहकों की तस्वीरें अपलोड कर देते हैं। यह डेटा सालभर तक सिस्टम में रहता स्टोर रहता है।

हर बार जब फेसवॉच का सिस्टम शॉपलिफ्टर की पहचान करता है तो इसकी सूचना सुपर आइडेंटिफायर के पास पहुंच जाती है। यह चेहरे को याद रखने की विशेष प्रतिभा वाले व्यक्ति की तरह होता है। सुपर आइडेंटिफायर को कुछ सेकंड में ही फेसवॉच डेटाबेस से इसकी पुष्टि करने को कहा जाता है। इसके बाद सभी स्टोर्स को अलर्ट भेज दिया जाता है।

स्टोर में एंट्री करते ही चेहरे की बायोमेट्रिक डिटेल्स पढ़ता है सॉफ्टवेयर

फेसवॉच सॉफ्टवेयर का आइडिया वाकई काम का है। शुरूआत में जेबकतरों से सुरक्षा के लिए यह इनोवेशन किया था।
फेसवॉच ब्रिटेन के 400 स्टोर्स में काम कर रहा है। लाखों फोटो व वीडियो से लैस सिस्टम किसी व्यक्ति के स्टोर में आते ही उसके चेहरे की बायोमेट्रिक जानकारी रीड कर लेता है। फ्लैग्ड लोगों के डेटाबेस के आधार पर जांच पड़ताल की जाती है।

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Dr. Kirti Sisodia

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