

अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) से नेविगेशन सैटेलाइट ‘नाविक’ एनवीएस-1 का सफल प्रक्षेपण किया। यह सैटेलाइट भारतीय सेना को खासकर सशस्त्र बलों को मजबूत करने और नौवहन सेवाओं की निगरानी के लिए कारगर साबित होगा। भारत के अपने पोजिशनिंग सिस्टम ‘नाविक’ से लैस होकर जवान और ज्यादा मजबूत होंगे।
नाविक अमेरिकी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) की तरह है। नाविक का उपयोग स्थलीय, हवाई और समुद्री परिवहन, लोकेशन-आधारित सेवाओं, निजी गतिशीलता, संसाधन निगरानी, सर्वेक्षण और भूगणित, वैज्ञानिक अनुसंधान, समय प्रसार और इमरजेंसी जैसी स्थितियों के लिए किया जाएगा।
एनवीएस-1 की खासियत
• 2232 किलो वजनी सैटेलाइट है।
• श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन केंद्र से लॉन्च किया गया।
• प्रक्षेपण के 20 मिनट बाद रॉकेट करीब 251 किमी की ऊंचाई पर भू-स्थिर स्थानांतरण कक्ष में उपग्रह को स्थापित कर सकता है।
• 1500 किमी क्षेत्र में तात्कालिक स्थिति तथा समय संबंधी सेवाएं देगा।
जीपीएस की तरह ही काम करने वाला यह सैटेलाइट भारत और मुख्य भूमि के आसपास करीब 1,500 किमी के क्षेत्र में तात्कालिक स्थिति तथा समय संबंधी सेवाएं उपलब्ध करवाएगा। नाविक को इस तरह से तैयार किया गया है कि सिग्नल 20 मीटर से बेहतर उपयोगकर्ता की स्थिति और 50 नैनोसेकंड से बेहतर समय सटीकता दे सके।
कहां होगा इस्तेमाल?
स्थलीय, हवाई और समुद्री परिवहन, लोकेशन-आधारित सेवाओं, निजी गतिशीलता, संसाधन निगरानी, सर्वेक्षण और भूगणित, वैज्ञानिक अनुसंधान, समय प्रसार और जीवन सुरक्षा चेतावनी प्रसार में इस्तेमाल किया जाएगा।

