

• सैटेलाइट लॉन्चिंग मार्केट में तेजी से उभर रहा भारत
• अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के 140 स्टार्टअप कर रहे काम
• प्रत्येक वर्ष तीन गुना बढ़ रहा है निवेश
साल 1963 में जब भारत ने अपने पहले रॉकेट को लॉन्च किया था। तब भारत को इस तरह से देखा गया कि एक गरीब देश दुनिया की सबसे अत्याधुनिक तकनीक का पीछा कर रही है। लेकिन ये भारतीयों के साहस के दम पर ही पाया कि आज अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया भारत के साथ काम करना चाहती है। इसके एकदम शुरूआती दिनों को देखें तो भारतीय वैज्ञानिकों ने एक साइकिल पर रॉकेट को लॉन्चपैड तक ले जाकर चुनौतियों से भरी अंतरिक्ष तकनीक में अपना कदम रखा था।
आझ भारत आज क्षेत्र में अधिक मजबूती से खड़ा है। ये वो समय है जब भारत में अंतरिक्ष तकनीक पर कम से कम 140 रजिस्टर स्टार्ट-अप काम कर रहे हैं। इनमें से एक रिसर्च क्षेत्र भी शामिल है। अंतरिक्ष तकनीक से जुड़ा क्षेत्र पूंजी निवेशकों के लिए भारत में सबसे अधिक मांग वाले क्षेत्रों में से एक बन गया है।
तरिक्ष स्टार्ट-अप ने 2022 में जुटाए 980 करोड़- रिपोर्ट
साल 2022 में अंतरिक्ष स्टार्ट-अप में निवेश के द्वारा लगभग 980 करोड़ रुपए जुटाए हैं। ये हर साल बढ़ रहा है। ISRO इन स्टार्ट-अप के लिए सभी जरूरी साधन देने में मदद करता है।
वहीं बात करें तो लगभग 95 प्रतिशत की सफलता दर वाला वर्कहॉर्स रॉकेट हैवी लोड के लिए दुनिया के सबसे विश्वसनीय रॉकेट्स में से एक है। इसने एक सैटेलाइट की लॉन्चिंग की लागत को बिल्कुल आधा किया है। वहीं, अंतरिक्ष में उपकरण भेजने के मार्केट का आकार लगभग 49 हजार करोड़ रुपए का है, जिसक 2025 तक तीन गुना होने के संकेत हैं।

