
इंसानी शरीर मुख्य रूप से पानी से ही बना है। पानी कल आज और कल की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है। इसके अलावा रोटी कपड़ा और मकान इन तीनो को मनुष्य की मूलभूत जरूरतों में शामिल किया गया है, पर क्या ये सही नहीं है कि इन तीनों में पानी समाहित है वो भी पूरी तरह से। दरअसल पानी किसी भी देश की विकास योजना में सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। हालांकि वर्तमान परिवेश में इस सबसे ‘कीमती प्राकृतिक संसाधन’ को लेकर दुनिया के कुप्रबंधन ने एक स्थायी भविष्य के लिए जल संसाधन को और अधिक जरूरी बना दिया है।
दुनिया के कई हिस्सों में आज भी ‘सुरक्षित पानी’ तक पहुंच नहीं है, क्योंकि हर साल किसी न किसी देश मंी जल संकट की समस्या मुख्य रूप से दिखाई देती ही है। डर ये है कि साल-दर-साल ये परेशानी बड़ी होती जा रही है। वहीं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के साथ बढ़ती हुई मांगों ने अप्रत्याशित जल आपूर्ति की स्थिति को जन्म दिया है, जिसने प्रमुख वैश्विक मुद्दों की प्रगति को रोककर रखा है।
क्या भारत जल प्रबंधन के लिए बन सकता है दुनिया का केंद्र!
तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में आज भारत दुनिया का केंद्र बना हुआ है। लगभग हर मोर्चे पर भारतीयों ने अपनी कौशल का प्रदर्शन बखूबी किया है। वहीं जल प्रबंधन को लेकर भारत की स्थिति की बात की जाए तो, इस क्षेत्र में भी तमाम वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत समग्र, व्यापक जल संसाधन प्रबंधन नीति और संरक्षण के साथ एक अग्रणी देश के रूप में उभर कर सामने आया है। जल संरक्षण को लेकर भारत के प्रयासों को वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। जी-20 में जल संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों को लेकर भारत की तारीफ इसका उदाहरण है।
इस बात पर गौर करना बेहद जरूरी है कि भारत विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के नियमित क्रियान्वयन के साथ ही जल प्रबंधन के उद्देश्य का समर्थन करता आया है। यही नहीं दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ती पानी की कमी और जलवायु-प्रेरित आपदाओं की पृष्ठभूमि के खिलाफ देश ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन 2023 में जल क्षेत्र में 240 बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता भी जताई है, जिससे सम्मेलन में भाग लेने वाले लगभग सभी देशों और
हितधारकों से भारत को समर्थन मिला।
जल संरक्षण की दिशा में भारत के प्रयास
भारत में पानी राज्य की विषय सूची में शामिल है, लेकिन इसके संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही है। विभिन्न कार्यक्रमों से तकनीकी और वित्तीय सहायता के माध्यम से केंद्र राज्यों के प्रयासों को पूरा करने का प्रयास करता है। वहीं MGNREGS, अटल भूजल योजना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, अटल मिशन, कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन (अमृत), दिल्ली के एकीकृत भवन उपनियम (UBBL)), मॉडल बिल्डिंग उपनियम (MBBL), शहरी और क्षेत्रीय विकास योजना निर्माण और कार्यान्वयन दिशानिर्देश, जल शक्ति अभियान और जल जीवन मिशन के माध्यम से कई जल संरक्षण कार्यक्रम भी भारत में चलाए जा रहे हैं।
कैच द रेन भारत की एक अभिनव पहल
वर्षा जल संरक्षण की दिशा में भी भारत ने एक अभिनव पहल कैच द रेन के माध्यम से की है। जिसके जरिए वर्षा जल के उपयोग, ग्राउंड वॉटर रिचार्ज और सिंचाई के लिए भूजल के उपयोग को लेकर जागरूकता लोगों में लाई गई।
‘हर घर जल’ से देश के अंतिम छोर तक पहुंच रहा है शुद्ध पेयजल
भारत सरकार की जल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता ही वह वजह है कि आज देश में 11 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों के पास नल के पानी का कनेक्शन पहुंच रहा है। भारत में 123 जिलों और 1.53 लाख से अधिक गांवों ने ‘हर घर जल’ की सूचना दी है, जिसका मतलब ये है कि आज हर घर में नल के माध्यम से पीने का साफ पानी पहुंच रहा है।
हम ये नहीं कह सकते हैं कि जल संरक्षण के सभी पहलुओं पर हम पूरी तरह से खरे उतरे हैं, लेकिन ये जरूर कह सकते हैं की एक सकारात्मक शुरूआत हमें बदलाव तक लेकर जाएगी। भारत जल संरक्षण के लिए विभिन्न सरकारी संगठनों, निजी संस्थानों और एनजीओ के माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में प्रयासरत है। लगातार की जा रही इन कोशिशों के साथ पानी के प्रबंधन और संचालन के तरीकों में एक बड़ा बदलाव दिखाई देता है। इस बात में कोई दोराय नहीं कि जल केवल दोहन करने का संसाधन नहीं है बल्कि जल प्रबंधन के लिए समग्र सोच की आवश्यकता है ताकि इस बहुमूल्य संसाधन को मानव अस्तित्व और पारिस्थितिक तंत्र के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

