TRADITIONAL SPORTS: बचपन के पारंपरिक खेल देते हैं कई गुण, धैर्य, एकाग्रता और एकता सिखाने का सबसे अच्छा माध्यम!

हममें से हर किसी ने बचपन में गुल्ली-डंडा, पिट्‌ठू, कंचे जैसे खेल खेलें होंगे। बचपन के ये पारंपरिक गेम हमारी जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा होते थे फिर चाहे भरी दोपहरी हो या कंपकपाती ठंड। पर वर्तमान मोबाइल गेम्स ने इन पारम्परिक खेलों को गायब कर दिया है। लेकिन यह जानना बेहद जरूरी है कि पुराने खेल बढ़ते बच्चों को जीवन के कई गुण सिखा जाते हैं। विज्ञान भी यह बात मानता है कि पारंपरिक खेल मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरुरी है।

बेहतर मैनेजमेंट और टीम स्पीरिट को बढ़ाता है

कंचे, गुल्ली-डंडा या लट्‌टू जैसे खेल ध्यान बढ़ाने में काफी मददगार साबित होते हैं। साथियों के साथ मिलकर विपक्षी टीम के खिलाड़ियों को हराना, योजना बनाना बेहतर रणनीति बनाना सिखाता है। इसके अलावा इन खेलों में ख़ूब दौड़-भाग, उठक-बैठक सब शामिल हैं। प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ सहयोग करना भी खेल से सीखा जा सकता है। बच्चों में संज्ञानात्मक व्यवहार (कॉग्निटिव बिहेवियर) भी बेहतर होता जाता है।

तर्क करने की क्षमता बढ़ती है

गिप्पा या लंगड़ी टांग (स्टापू, टिक्कर बिल्ला), कंचे, गुट्टे आदि जैसे खेल मैथ बेस्ड होते हैं जिन्हें खेलने से गणित अच्छा होता है। इन्हें खेलने का दूसरा फायदा ये भी है कि खेल के दौरान तर्क-वितर्क और झगड़ों में समझौता करना सीखा जा सकता है। वहीं गिप्पा शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। एक टांग पर खड़े होकर कूदते हुए चलना शरीर में बैलेंस बनाना सिखाता है और शरीर का तालमेल भी डेवलप होता है।

बच्चे धैर्य सीखते हैं

कुछ खेल ध्यान और चेतना के सिखाने का काम करते हैं जैस रुमाल झपट, लट्‌टू और घोड़े पर दाम। इन खेलों पर पूरा ध्यान रुमाल और लट्‌टू पर लगाना होता है। वहीं आंख मिचौनी में आंखें बंद करके साथी को ढूंढना भी फायदेमंद होता है। खेल में जीत पाने के लिए कई कठिनाइयों से होकर गुज़रना होता है। योजनाबद्ध ढंग से रुमाल या साथी को झपटने के लिए धैर्य की जरूरत होती है। और नपे-तुले क़दमों व फुर्ती की भी। कसरत का यह एक बेहतरीन ज़रिया है।

टीम भावना विकसित होती है

ऐसे खेल जिन्हें मिलकर खेले जाते हैं, ऐसे गेम्स टीम भावना विकसित करते हैं जैसे कि पिड्‌डू, चेन, विष-अमृत (बर्फ-पानी) नदी-पहाड़ आदि। इनमें दो विपक्षी टीम होती हैं, जो अपनी-अपनी टीम को जिताने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं। एक-दूसरे को बचाना, हाथ पकड़कर दौड़ लगाना, इस तालमेल के साथ ये खेले जाते हैं। दौड़-भाग वाले ये खेल बच्चों में टीमवर्क या एकजुट होकर काम को पूरा करना और टीम भावना सिखाते हैं।

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Dr. Kirti Sisodia

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