Koneru Humpy: दूसरी बार विश्व रैपिड शतरंज चैंपियनशिप का खिताब जीता!

Koneru Humpy: भारतीय ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी ने 2024 में दूसरी बार महिला विश्व रैपिड शतरंज चैंपियनशिप का खिताब जीतकर भारत का नाम गर्व से ऊंचा किया। उन्होंने इंडोनेशिया की इरीन सुकंदर को हराकर यह खिताब अपने नाम किया। इससे पहले 2019 में भी उन्होंने यह प्रतियोगिता जीती थी। चीन की जू वेनजुन के बाद हम्पी यह खिताब एक से ज्यादा बार जीतने वाली दूसरी महिला खिलाड़ी बन गईं।

पिता के सपनों को किया साकार

हम्पी का जन्म 31 मार्च 1987 को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में हुआ। उनके पिता अशोक कोनेरू, जो स्वयं शतरंज खिलाड़ी थे, ने बेटी को शतरंज में महारत दिलाने का सपना देखा। उन्होंने अपनी बेटी का नाम ‘हम्पी’ रखा, जिसका अर्थ विजयी होता है। अपनी बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए अशोक ने अपनी नौकरी तक छोड़ दी और उसे शतरंज के गुर सिखाए। हम्पी ने अपनी मेहनत और पिता की प्रेरणा से इस सपने को हकीकत में बदल दिया।

शुरुआती सफर और उपलब्धियां

हम्पी ने सिर्फ छह साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया और नौ साल की उम्र में तीन राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीते। उनके अद्भुत कौशल और लगन ने उन्हें भारतीय शतरंज का उभरता सितारा बना दिया।

करियर और व्यक्तिगत जीवन

वर्तमान में हम्पी ओएनजीसी में चीफ मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पति अवनेश सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करते हैं। हम्पी के जीवन का हर पहलू उनके संघर्ष, समर्पण और सफलता की कहानी कहता है।

विश्व खिताब जीतने की खुशी

दूसरी बार विश्व रैपिड शतरंज चैंपियनशिप का खिताब जीतने के बाद हम्पी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, “यह मेरे लिए एक अप्रत्याशित सफलता है। पूरे साल मैंने संघर्ष किया, लेकिन इस जीत ने मुझे नई ऊर्जा और आत्मविश्वास दिया।”

ये थीं भारत की पहली महिला ग्रैंडमास्टर

एस विजयलक्ष्मी भारतीय शतरंज की पहली महिला ग्रैंडमास्टर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1986 में ताल शतरंज ओपन से की और कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिताब अपने नाम किए। साल 2000 में उन्होंने ग्रैंडमास्टर का टाइटल जीता और ओलंपियाड खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। विजयलक्ष्मी ने भारतीय महिलाओं के लिए शतरंज की दुनिया में रास्ता तैयार किया।

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भारतीय शतरंज की नई ऊंचाइयां

कोनेरू हम्पी और एस विजयलक्ष्मी जैसी खिलाड़ी भारतीय शतरंज की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। उनकी उपलब्धियां न केवल भारतीय शतरंज को नई पहचान देती हैं, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं।

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Rishita Diwan

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