- Khel India Tribal Games 2026
- खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026
- छत्तीसगढ़ बना जनजातीय खेलों का नया केंद्र
Khel India Tribal Games 2026: छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर खेल और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। रायपुर के पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का भव्य समापन हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस आयोजन को जनजातीय प्रतिभाओं के लिए एक ‘ऐतिहासिक मंच’ करार दिया है। 10 दिनों तक चले इस खेल महाकुंभ ने न केवल देशभर की आदिवासी खेल प्रतिभाओं को निखारा, बल्कि छत्तीसगढ़ को देश के खेल मानचित्र पर एक मजबूत पहचान भी दिलाई।
छत्तीसगढ़ में होगा आयोजन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स अब हर साल छत्तीसगढ़ में आयोजित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के सहयोग से छत्तीसगढ़ को इस प्रथम राष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी का गौरव मिला। समापन समारोह के दौरान बॉक्सिंग लेजेंड मेरीकॉम और दिग्गज फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया की उपस्थिति ने खिलाड़ियों का उत्साह दोगुना कर दिया।
विजेताओं के लिए पुरस्कारों की बौछार
राज्य सरकार ने पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए बड़े नकद पुरस्कारों की घोषणा की है, जो उनकी मेहनत का सम्मान है,
- व्यक्तिगत स्पर्धाएं- स्वर्ण पदक (2 लाख रुपये), रजत (1.5 लाख रुपये) और कांस्य (1 लाख रुपये)।
- दलीय (टीम) स्पर्धाएं- स्वर्ण पदक (1 लाख रुपये), रजत (75 हजार रुपये) और कांस्य (50 हजार रुपये)।
छत्तीसगढ़ का शानदार प्रदर्शन
जीते 19 पदक
मेजबान छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने अपनी खेल क्षमता का लोहा मनवाया। राज्य ने कुल 19 पदक (3 स्वर्ण, 10 रजत और 6 कांस्य) अपने नाम किए।
- अनुष्का भगत (स्विमिंग)- 4 रजत पदक जीतकर राज्य की सबसे सफल खिलाड़ी रहीं।
- निकिता (वेटलिफ्टिंग)- स्वर्ण पदक जीतकर बेटियों का मान बढ़ाया।
- सिद्धार्थ नागेश (एथलीट)- एथलेटिक्स में स्वर्ण और रजत पदक हासिल किए।
- फुटबॉल और हॉकी- बालिका वर्ग की फुटबॉल टीम ने स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा, वहीं बालक वर्ग की हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीता।
- अन्य सितारे- निखिल खलखो और न्यासा पैकरा ने भी अपनी प्रतिभा से पदक तालिका में योगदान दिया।
पदक तालिका में राज्यों का दबदबा
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 की पदक तालिका में कर्नाटक ने प्रथम स्थान प्राप्त कर शीर्ष स्थान हासिल किया। ओडिशा दूसरे और झारखंड तीसरे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री ने इन राज्यों की टीमों को बधाई देते हुए कहा कि बस्तर से लेकर पूर्वोत्तर तक की प्रतिभा ने साबित कर दिया है कि कौशल केवल बड़े शहरों की जागीर नहीं है।
एकता और संस्कृति का महाकुंभ
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने आयोजन की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि देशभर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 2000 जनजातीय खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। यह आयोजन केवल जीत-हार तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने और उनकी पारंपरिक जड़ों (जैसे तीरंदाजी और कुश्ती) को आधुनिक खेल मंच से जोड़ने का काम किया है।
मुख्य सचिव विकास शील के नेतृत्व में राज्य प्रशासन ने खिलाड़ियों के आवास, भोजन और छत्तीसगढ़ी आतिथ्य की बेहतरीन व्यवस्था सुनिश्चित की। यह आयोजन इस विश्वास के साथ समाप्त हुआ कि आने वाले समय में ये खिलाड़ी ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराएंगे।
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