Ram Mandir के लिए दान देने वालों में कौन-कौन हैं शामिल, कितने दिया सबसे बड़ा दान?

Ram Mandir Ayodhya Donation: कहते हैं ईश्वर से बड़ा दाता कोई नहीं है। लेकिन आज के दौर में दान श्रद्धा का एक रूप है जिसे लोग भक्ति स्वरूप दान करते हैं। भगवान राम मंदिर के निर्माण के लिए भी लोगों ने दिल खोलकर दान किया है। भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से लोगों ने राम मंदिर निर्माण के लिए कुछ न कुछ दान किया है। पर क्या आप जानते हैं कि सबसे बड़ा दान किसने दिया है साथ ही ये भी जानते हैं कि कहां-कहां से अयोध्या में भगवान राम मंदिर के निर्माण के लिए श्रद्धा से दान किया है….

इस मंदिर ने दिया 10 करोड़ रुपए 

बिहार के पटना के महावीर मंदिर ने अयोध्‍या राम मंदिर निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपए का दान स्वरूप भेंट किया है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष ने साल 2019 में ही दान की घोषणा कर दी थी जब राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था। 

मोरारी बापू ने दिया दान 

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वेबसाइट पर एक और दानदाता की जानकारी दी गई है, वो हैं आध्यात्मिक गुरु और कथावाचक मोरारी बापू। राम मंदिर निर्माण के लिए मोरारी बापू ने राम मंदिर के लिए 11.3 करोड़ रुपये का दान किया है। इसके अलावा अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन से भी उनके रामभक्त अनुयायियों ने  8 करोड़ रुपये का दान दिया है। गुजरात के हीरा कारोबारी गोविंदभाई ढोलकिया ने 11 करोड़ रुपये का दान राम मंदिर निर्माण के लिए दिया है। 

सूरत के कारोबारी ने दिया है 101 किलो सोना 

सूरत के रहने वाले कारोबारी ने राम मंदिर के लिए 101 किलो सोने का दान किया है। डायमंड बिजनेस करने वाले दिलीप कुमार वी लाखी ने राम मंदिर को ये बड़ा दान श्रद्धा के रूप में दिया है। दान स्वरूप मिले इस 101 किलो सोने का इस्तेमाल गर्भगृह के सोने के द्वारा, स्तंम्भों आदि में हुआ है। मौजूदा वक्त के कीमत के हिसाब से 10 ग्रान सोने की कीमत 68 हजार के करीब है, ऐसे में दिलीप ने करीब 68 करोड़ रुपए का दान राम मंदिर को किया है। 

रुपए के अलावा भी लोगों ने दिया है दान 

रुपयों के अलावा भी कुछ खास चीजें मंदिर को दान में दी गई हैं, जैसे मंदिर के लिए घंटा कासगंज से भेजा गया है, वहीं  नीचे पड़ने वाली राख रायबरेली के ऊंचाहार से दान में आई है। मंदिर के लिए गिट्टी मध्य प्रदेश के छतरपुर से पहुंची तो ग्रेनाइट तेलांगाना से दान किया गया है। पत्थर राजस्थान के भरतपुर से पहुंचा तो दरवाजों की लकड़ी महाराष्ट्र से भेजी गई है। 

Positive सार 

दान कभी छोटा या बड़ा नहीं होता है, श्रद्धा से दिया हुआ हर वो चीज जो अंतत: किसे के काम आए वो दान कहलाती है। दान में छुपे हुए स्वरूप में भक्ति, श्रद्धा, प्रेम और नेकी छुपी होती है। भले ही राम मंदिर निर्माण के लिए 5500 करोड़ रुपए से अधिक का दान दिया गया हो, लेकिन इसमें करोड़ों रुपए से लेकर 1 रुपए तक का दान शामिल है। यानी कि दान का रूप बड़ा या छोटा नहीं है ये तो बस भक्ति है राम के लिए।

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Rishita Diwan

Content Writer

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