Surrender Naxals: कैसे बदल रही आत्मसमर्पित नक्सलियों की जिंदगी?

MNREGA for Surrender Naxals

  • 105 आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिला मनरेगा जॉब कार्ड
  • पुनर्वास को मिली गति

MNREGA for Surrender Naxali: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उस मंशा को ज़मीनी स्तर पर साकार किया जा रहा है, जिसके तहत राज्य में मुख्यधारा से जुड़कर शांति का मार्ग अपनाने वाले आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

आत्मसमर्पित नक्सलियों को स्थायी आजीविका

सुकमा जिला प्रशासन ने 105 आत्मसमर्पित नक्सलियों को स्थायी आजीविका से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रशासन ने इन सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों के मनरेगा (MNREGA) जॉब कार्ड तैयार कर उन्हें वितरित किए हैं। इस पहल के लिए जिले के प्रभारी मंत्री एवं वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने जिला प्रशासन को हार्दिक बधाई दी है। यह कदम दर्शाता है कि सरकार केवल समर्पण को प्रोत्साहित नहीं कर रही, बल्कि उनके पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन को भी सुनिश्चित कर रही है।

रोजगार का अधिकार

जिला कलेक्टर के निर्देश और जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन में, सुकमा के पुनर्वास केंद्र में एक विशेष शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के लाभों से आत्मसमर्पित नक्सलियों को जोड़ना था।

मनरेगा योजना की प्रमुख बातें

  • वैधानिक रोजगार, जॉब कार्डधारी परिवारों को 100 दिनों का वैधानिक रोजगार उपलब्ध कराया जाता है।
  • दैनिक मजदूरी, जॉब कार्डधारियों को प्रतिदिन 261 रुपये की मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाता है।
  • रोजगार स्थल, यह रोजगार आमतौर पर उनके ही गाँव या आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध कराया जाता है।
  • मनरेगा का जॉब कार्ड इन लोगों को रोजगार का अधिकार प्रदान करता है और उन्हें एक निश्चित आय सुनिश्चित करने में मदद करता है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

पारदर्शी प्रक्रिया से 105 लोगों को मिला लाभ

आयोजित शिविर में मौजूद सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों ने मनरेगा योजना का लाभ लेने और जॉब कार्ड बनवाने में गहरी रुचि दिखाई। प्रशासन की पारदर्शी और त्वरित प्रक्रिया के फलस्वरूप, कुल 105 आत्मसमर्पित नक्सलियों के जॉब कार्ड तैयार किए गए और मौके पर ही उन्हें वितरित कर दिए गए।

लाभार्थियों में 62 पुरुष और 43 महिलाएँ शामिल हैं, जो दर्शाता है कि पुनर्वास कार्यक्रम में लिंग-समानता का भी ध्यान रखा जा रहा है। इन जॉब कार्डों के वितरण से, माओवाद के प्रभाव से दूर होकर मुख्यधारा में लौटे इन लोगों को अब कानूनी और संगठित श्रम बाजार में प्रवेश का अवसर मिल गया है।

स्थायी आजीविका और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा

मनरेगा जॉब कार्ड के वितरण के अतिरिक्त, शिविर का उद्देश्य आत्मसमर्पित युवक-युवतियों को भविष्य में स्थायी आय के साधन विकसित करने में मदद करना भी था। इसके लिए, शिविर में आजीविका डबरी निर्माण, बकरी शेड, मुर्गी शेड और सूअर शेड आदि हितग्राहीमुखी कार्यों की विस्तृत जानकारी भी दी गई।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में दी गई यह जानकारी, इन लोगों को केवल दिहाड़ी मजदूरी से नहीं, बल्कि पशुपालन और कृषि-आधारित स्थायी उद्यमों से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगी। यह प्रयास पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के राज्य सरकार के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।

सुकमा जिला प्रशासन की यह पहल छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या के समाधान के लिए केवल सुरक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण ही नहीं, बल्कि विकास और पुनर्वास-केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाने की नीति को सफलतापूर्वक दर्शाती है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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