Republic Day 2026: इस वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली का ‘कर्तव्य पथ’ छत्तीसगढ़ के शौर्य और अदम्य साहस का साक्षी बनने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रेस प्रीव्यू में छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपनी भव्यता से सबका ध्यान खींचा है। “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” की थीम पर आधारित यह झांकी उन गुमनाम जनजातीय नायकों को समर्पित है, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दी थीं।
झांकी का मुख्य आकर्षण
देश का पहला जनजातीय डिजिटल संग्रहालय
छत्तीसगढ़ की इस झांकी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित देश का पहला जनजातीय डिजिटल संग्रहालय है। इस संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती पर किया था। झांकी के माध्यम से इसी आधुनिक संग्रहालय की भव्यता को प्रदर्शित किया गया है, जहाँ डिजिटल तकनीक के जरिए देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को जीवंत किया गया है।
यह झांकी न केवल कला का प्रदर्शन है, बल्कि उन वीरों को एक डिजिटल श्रद्धांजलि भी है जिन्होंने स्वतंत्रता की वेदी पर अपने प्राण न्यौछावर किए।
वीर गुंडाधुर और भूमकाल विद्रोह की झलक
झांकी के अगले हिस्से (Front Part) में वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के महानायक वीर गुंडाधुर को उकेरा गया है। धुर्वा समाज के इस महान नेता ने अंग्रेजों के शोषणकारी कानूनों के खिलाफ बस्तर के आदिवासियों को एकजुट किया था। झांकी में विद्रोह के पारंपरिक प्रतीकों, आम की टहनियों और सूखी मिर्च को विशेष रूप से दिखाया गया है, जो उस समय गुप्त संदेश भेजने और क्रांति के आह्वान का जरिया हुआ करते थे।
शहीद वीर नारायण सिंह
झांकी का गौरवशाली पृष्ठ भाग
झांकी के पिछले हिस्से (Rear Part) में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह का ओजस्वी रूप दिखाई देता है। उन्हें घोड़े पर सवार और हाथ में तलवार लिए एक महान योद्धा के रूप में दर्शाया गया है। वीर नारायण सिंह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ का नेतृत्व किया और अकाल के समय गरीबों की मदद के लिए अंग्रेजों से लोहा लिया।
झांकी की प्रमुख विशेषताएं
| विशेषता | विवरण |
| थीम | स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्। |
| प्रमुख नायक | वीर गुंडाधुर (भूमकाल विद्रोह) और शहीद वीर नारायण सिंह। |
| विशेष उपलब्धि | 17 चुनिंदा राज्यों की झांकियों में छत्तीसगढ़ को मिला स्थान। |
| डिजिटल क्रांति | देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय का भव्य मॉडल। |
| कलात्मकता | जनसंपर्क विभाग के कलाकारों द्वारा एक माह की कड़ी मेहनत का परिणाम। |
राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की संस्कृति
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड के लिए देश भर से केवल 17 राज्यों की झांकियों का चयन किया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ का स्थान पाना राज्य के लिए गौरव की बात है। राष्ट्रीय रंगशाला कैंप में हुए प्रेस प्रीव्यू के दौरान राष्ट्रीय मीडिया ने इस झांकी की भूरी-भूरी प्रशंसा की। यह झांकी स्पष्ट संदेश देती है कि भारत की स्वतंत्रता केवल शहरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि बस्तर के घने जंगलों से लेकर मैदानी इलाकों तक जनजातीय वीरों ने स्वाभिमान की मशाल जलाए रखी थी।
परंपरा और तकनीक का संगम
छत्तीसगढ़ की यह झांकी ‘विरासत’ और ‘विकास’ का बेहतरीन उदाहरण है। एक तरफ जहाँ यह प्राचीन जनजातीय विद्रोहों की याद दिलाती है, वहीं दूसरी ओर ‘डिजिटल संग्रहालय’ के माध्यम से आधुनिक भारत की तकनीकी प्रगति को भी दर्शाती है। 26 जनवरी को जब यह झांकी कर्तव्य पथ पर निकलेगी, तो पूरा विश्व छत्तीसगढ़ के जनजातीय शौर्य और ‘वंदे मातरम्’ के मंत्र से गुंजायमान होगा।
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