Police Commissionerate system: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के इतिहास में 23 जनवरी 2026 की तारीख एक बहुत बड़ा बदलाव लेकर आने वाली है। सुभाष चंद्र बोस की जयंती के दिन रायपुर अपनी पुरानी पुलिसिंग व्यवस्था को अलविदा कहकर पुलिस कमिश्नर प्रणाली को अपनाने जा रहा है। जिसे Police Commissionerate system भी कहते हैं।
Police Commissionerate system
कैबिनेट की बैठक में लिया गया फैसला
राजधानी रायपुर में इस बदलाव की कहानी 31 दिसंबर 2025 को साय कैबिनेट की बैठक में लिखी गई। हालांकि चर्चा थी कि यह नए साल के पहले दिन से लागू होगा, लेकिन सरकार ने इसे पराक्रम दिवस यानी 23 जनवरी से लागू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया। रायपुर अब इंदौर और उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों की तर्ज पर चलेगा।
इस सिस्टम को लागू करने का सबसे बड़ा आधार है जनसंख्या। 1983 के राष्ट्रीय पुलिस आयोग ने साफ कहा था कि जिस शहर की आबादी 10 लाख से ऊपर हो जाए, वहां पुरानी दोहरी नियंत्रण प्रणाली काम नहीं आती। रायपुर की बढ़ती आबादी और राजधानी होने के नाते बढ़ते वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
कमिश्नरी प्रणाली से क्या बदलाव होंगे?
1. पुलिस के अधिकार और निर्णय-क्षमता बढ़ेगी
अब पुलिस कमिश्नर को कई प्रमुख कार्यकारी शक्तियाँ मिलेंगी, जिनका प्रभार पहले कलेक्टर (अपराध-निरोधक प्रशासनिक अधिकारी) के पास होता था,
- धारा 144 लागू करना (अशांत स्थितियों में प्रतिबंध लगाना)
- आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई
- गन लाइसेंस सम्बंधित निर्णय सीधे कमिश्नर द्वारा
- इन अधिकारों के लिए पहले कलेक्टर की अनुमति जरूरी होती थी, अब कमिश्नर सीधे निर्णय ले सकेंगे।
- कमिश्नर एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की भूमिका भी निभाएंगे
2. नई पुलिस नेतृत्व संरचना
रायपुर कमिश्नरी मुख्यालय में तीन डीसीपी (Deputy Commissioner of Police) होंगे, जो अलग-अलग विभागों जैसे,
- अपराध (Crime)
- ट्रैफिक
- प्रोटोकॉल
- महिला अपराध आदि को देखेंगे।
इसके नीचे एसीपी और डीएसपी रैंक के अधिकारी थानों/क्षेत्रों के प्रभारी होंगे। पुरानी व्यवस्था की तुलना में पुलिस नेतृत्व और पदों की स्पष्ट हायरार्की बनेगी।
3. थानों-क्षेत्रों का नया विभाजन
रायपुर नगर निगम और बिरगांव नगर पालिका क्षेत्र कमिश्नरी के तहत आएँगे जबकि रायपुर ग्रामीण के लिए अलग-से एसपी (SP) सिस्टम रहेगा। कई प्रमुख थाने भी कमिश्नरी प्रणाली में शामिल किए जाने की तैयारी चल रही है, जैसे सिविल लाइन, तेलीबांधा, गोल बाजार आदि।
4. कानून-व्यवस्था की ज्यादा त्वरित प्रतिक्रिया
कमिश्नरी प्रणाली में पुलिस को निर्णय-लेने में तेजी मिलती है और कानून-व्यवस्था के मामलों में तेज़ प्रतिक्रिया संभव होती है। यह व्यवस्था खासकर बड़े शहरों में अपराध नियंत्रण, भीड़ नियंत्रण और आपात-स्थिति प्रबंधन में कारगर मानी जाती है।
रायपुर शहर को क्या फायदा मिलेगा?
रायपुर शहर की आबादी अब 20 लाख से अधिक हो गई है। ऐसे में परम्परागत पुलिस प्रणाली अब शहर में प्रभावी नहीं है। इसके अलावा आए दिन बड़े नेताओं के कार्यक्रम, रैली, जुलूस, आंदोलन, VVIP मूवमेंट शहर में पुलिसिंग को प्रभावित करती है ऐसे में कमिश्नरी प्रणाली शहर में लॉ एंड ऑर्डर को दुरुस्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।
क्या पुलिस को और पॉवर मिलेगा?
जी हां
इस व्यवस्था के आने के बाद पुलिस के पास वो 17 अधिकार आ जाएंगे जो पहले सिर्फ कलेक्टर के पास होते थे। अब अगर शहर में धारा 144 लगानी हो, लाठीचार्ज का आदेश देना हो या फिर गुंडा एक्ट और रासुका यानी कि NSA के तहत कार्रवाई करनी हो, तो पुलिस को फाइल लेकर कलेक्टोरेट के चक्कर नहीं लगाने होंगे।
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