Paintings of Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ की चित्रकलाएं और उनके मायने

Paintings of Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ की लोक कला और संस्कृति अपने आपमें विविधताएं लिए हुए हैं। यहां की लोक कलाओं को अब नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर भी पहचान मिलने लगी है। छत्तीसढ़ लोकनृत्य और लोक गीत के साथ ही यहां की पारंपरिक चित्रकारी भी अनूठी है। इतना ही नहीं हर चित्र कला के पीछे कोई ना कोई मायने भी छुपे होते हैं। आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ में कौन-कौन सी लोक चित्रकला बनाई जाती है।

गोदना चित्रकला

गोदना चित्रकला छत्तीसगढ़ की सबसे मशहूर चित्रकला है। गोदना आज के आधुनिक टैटू का ही पुराना और पांरपरिक रूप है। छत्तीगढ़ में इसे महिलाएं विशेषतौर पर अपने शरीर पर बनवाती हैं। गोदना बनाने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। पहले गोदना छत्तीसगढ़ के लोगों के जीवन का अहम हिस्सा हुआ करता था। अपने शरीर में कम से कम एक गोदना होना जरूरी मान जाता था। अब इस कला का उपयोग कपड़ों में और वॉल पेंटिंग्स में भी किया जाने  लगा है।

गोंड चित्रकला

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है यह कला गोंड जनजाती के लोग बनात हैं हालांकी यह चित्र सिर्फ छत्तीसगढ़ के गोंड ही नहीं बल्की मध्यभारत के राज्यों में रहने वाले गोंड जनजाती भी बनाती है। इस चित्रकारी में ये लोग प्राकृतिक रंगों जैसे चारकोल, पीली-लाल मिट्टी, गोबर, चूना और छुही का इस्तेमाल करते हैं। गोंड चित्रकारी में अक्सर लोक कथाओं, किवतंतियो को अपनी चित्रकारी में दर्शाते हैं।                     

सवनाही चित्रकला      

सवनाही चित्रकला को सावन के महीने में बनाया जाता है इसलिए इसे सवनाही चित्रकला कहा जाता है। सावन की अमावस्या को जिस दिन हम हरेली मनाते हैं उस दिन महिलाएं इसे घर की मुख्य दीवार बर बनाई जाती है। इस चित्र में गोबर से दैत्य या बंदर की प्रतिकात्मक तस्वीर बनाई जाती है। माना जाता है कि हरेली अमावस्या के दिन बुरी शक्तियों की ताकत बढ़ जाती है और इस तरह से दीवार पर सवनाही चित्र बनाने से उन शक्तियों का बुरा प्रभाव घर पर नही पड़ता है।

नोहडेरा, रजवार भित्ती चित्रकला

यह चित्रकला घर की छबाई करते वक्त मिट्टी से ही उभरी हुई आकृति के रूप में बनाया जाता है। यह विशेष रूप से गोंड जनजाती में बनाया जाता है। इस कला में दीवार पर पशु-पक्षी और पेड़ पौधों की आकृतियां बनाई जाती है। इसी तरह सरगुजा संभाल में रजवार भित्ती चित्र बनाया जाता है। रजवार और नोहडेरा में मुख्य अंतर यह है कि नोहडेरा में ज्यादा रंगों का उपयोग नही किया जाता  वहीं रजवार चित्रकला को काफी रंगीन बनाया जाता है।

मुरिया चित्रकारी

मुरिया चित्रकारी, छत्तीसगढ की मुरिया जनजाती के लोगों के द्वारा बनाई जाती है। मुरिया पेंटिंग मं सफेद या गेरू सतह पर काले रंग से चित्रकारी की जाती है। मुरिया चित्रकारी में बस्तर की संस्कृति और त्योहारों को दर्शाया जाताहै। अब मुरिया पेंटिंग को पूरे देश में पहचान मिल चुकी है। इसका उपयोग कपड़ों पर भी किया जाने लगा है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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