Padma Shri 2026
कौन हैं बुधरी ताती?
दंतेवाड़ा की ‘बड़ी दीदी’ को पद्मश्री
Padma Shri 2026: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग, जो कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ नक्सली संघर्ष के लिए सुर्खियों में रहता था, आज एक नई रोशनी के कारण चर्चा में है। यह रोशनी फैलाई है बुधरी ताती ने, जिन्हें भारत सरकार ने वर्ष 2026 के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। दंतेवाड़ा के हीरानार गांव की रहने वाली बुधरी ताती को प्यार से लोग ‘बड़ी दीदी’ कहते हैं। उन्होंने अपने साहस और निस्वार्थ सेवा से अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में विकास की नई इबारत लिखी है।
संघर्ष से सेवा तक का सफर
बुधरी ताती का जीवन चुनौतियों से भरा रहा है, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। बीते 36 से 40 वर्षों से वह लगातार समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। जिस दौर में दंतेवाड़ा और बस्तर के अंदरूनी इलाकों में जाना जोखिम भरा माना जाता था, उस दौर में बुधरी ताती ने महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के उस वर्ग के लिए समर्पित कर दिया, जो मुख्यधारा से कटा हुआ था।
अबूझमाड़ में शिक्षा-स्वावलंबन की लौ
नक्सलवाद के साये में जी रहे अबूझमाड़ जैसे ‘हार्डकोर’ इलाकों में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं था। बुधरी ताती ने यहाँ की महिलाओं को न केवल संगठित किया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा भी उठाया।
- महिला सशक्तिकरण
उन्होंने अब तक 500 से अधिक महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया है। आज ये महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं।
- शिक्षा का प्रसार
जो बच्चे संघर्ष के कारण स्कूलों से दूर हो गए थे, उनके बीच बुधरी ताती ने शिक्षा की अलख जगाई। उन्होंने बच्चियों की शिक्षा पर विशेष जोर दिया, ताकि आने वाली पीढ़ी जागरूक बन सके।
- बुजुर्गों का सहारा
समाज सेवा केवल युवाओं तक सीमित नहीं रही; बुधरी ताती वृद्धाश्रमों में रहने वाले बेसहारा बुजुर्गों की भी सेवा करती हैं। उनके लिए वह एक बेटी और एक रक्षक की तरह खड़ी रहती हैं।
क्यों कहा जाता है ‘बड़ी दीदी’?
बस्तर की स्थानीय संस्कृति में ‘दीदी’ शब्द सम्मान और विश्वास का प्रतीक है। बुधरी ताती ने जिस तरह से हर पीड़ित की मदद की और हर घर तक पहुँच बनाई, उससे वह पूरे इलाके के लिए एक अभिभावक बन गईं। लोग उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए ‘बड़ी दीदी’ कहकर पुकारते हैं। उनकी निस्वार्थ भावना ही है कि आज उन्हें छत्तीसगढ़ सरकार के बाद अब केंद्र सरकार द्वारा देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ के लिए चुना गया है।
समाज के लिए एक मिसाल
बुधरी ताती की कहानी यह साबित करती है कि बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े संकल्प की आवश्यकता होती है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जहाँ डर का माहौल रहता था, वहाँ उन्होंने प्रेम और सेवा के माध्यम से शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया। उनके कार्यों ने न केवल दंतेवाड़ा बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।
Positive सार
2026 का पद्मश्री पुरस्कार बुधरी ताती के दशकों के संघर्ष और तपस्या का प्रतिफल है। वह उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो विपरीत परिस्थितियों में भी समाज को बदलने का माद्दा रखती हैं। ‘बड़ी दीदी’ का यह सफर अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जा रहा है, जो बस्तर के बदलते स्वरूप की एक सुखद तस्वीर है।
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