Naxal-free Chhattisgarh: शांति और विकास की ओर बढ़ रहा छत्तीसगढ़!

Naxal-free Chhattisgarh:छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक नई उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षाबलों द्वारा की गई प्रभावी कार्रवाई से यह संकेत मिल रहा है कि नक्सलवाद का समूल उन्मूलन अब दूर नहीं। हाल के अभियानों में मिली बड़ी सफलताओं ने यह साबित कर दिया है कि प्रदेश अब गनतंत्र से गणतंत्र की ओर मजबूती से कदम बढ़ा चुका है।

बस्तर में बदलाव की बयार

बस्तर, जो कभी नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता था, अब शांति और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। यहां हाल ही में सुरक्षाबलों ने एक ऐतिहासिक अभियान चलाया, जिसमें नक्सल संगठनों को बड़ा झटका लगा। यह केवल एक मुठभेड़ नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत थी—एक ऐसा युग जहां हिंसा की जगह विकास लेगा, और भय की जगह विश्वास।

सुरक्षाबलों की वीरता और रणनीति

नक्सलवाद से निपटने के लिए सुरक्षाबलों ने असाधारण वीरता और रणनीतिक कुशलता का परिचय दिया है। हालिया अभियानों में उन्होंने नक्सलियों के गढ़ में घुसकर निर्णायक कार्रवाई की, जिससे स्पष्ट हो गया कि अब इस समस्या का स्थायी समाधान नजदीक है। इस दौरान जवानों ने अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया और अपनी जान की परवाह किए बिना प्रदेश को सुरक्षित बनाने के लिए आगे बढ़े।

नक्सलवाद उन्मूलन की नींव

नक्सलवाद केवल एक सुरक्षा चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ा मुद्दा भी है। वर्षों तक यह समस्या इसलिए बनी रही क्योंकि प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी थी। लेकिन अब सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और शिक्षा एवं रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से नक्सलवाद की जड़ें कमजोर की जा रही हैं।

पूरी हो रही है बुनियादी सुविधाएं

सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी आवश्यकताओं की उपलब्धता से जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए साधन विकसित किए जा रहे हैं, जिससे युवा नक्सल संगठनों से अलग होकर मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।

शांति की राह पर छत्तीसगढ़

आने वाले समय में प्रदेश नक्सलवाद मुक्त होकर विकास और शांति की मिसाल बनेगा। अब तक सुरक्षाबलों द्वारा किए गए अभियानों ने नक्सल संगठनों की शक्ति को कमजोर कर दिया है और आने वाले वर्षों में यह पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य एक नई उम्मीद लेकर आया है।

यह केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि एक दृढ़ संकल्प है—एक ऐसा संकल्प जो प्रदेश के हर नागरिक से किया गया वादा है। शांति और विकास की इस यात्रा में आम जनता की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जब लोग भयमुक्त होकर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास दिखाएंगे, तब नक्सलवाद के अस्तित्व का अंत होगा।

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Positive सार

छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के खात्मे की निर्णायक घड़ी की ओर बढ़ रहा है। सुरक्षाबलों की वीरता, सरकार की रणनीति और जनता के सहयोग से यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। आने वाले समय में यह प्रदेश केवल विकास, शांति और समृद्धि का पर्याय बनेगा।

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Rishita Diwan

Content Writer

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