Kumar Bhaskar Varma Setu
गुवाहाटी की नई लाइफलाइन
कुमार भास्कर वर्मा सेतु और पूर्वोत्तर की बदलती तस्वीर
Kumar Bhaskar Varma Setu: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को असम के बुनियादी ढांचे में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ का भव्य उद्घाटन किया। यह पुल केवल कंक्रीट का एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का नया मार्ग है। कनेक्टिविटी के इस महायज्ञ में पुल के साथ-साथ डिब्रूगढ़ में ‘इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी’ (ELF) का लोकार्पण भी किया गया, जो रणनीतिक सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ा मील का पत्थर है।
कुमार भास्कर वर्मा सेतु
इंजीनियरिंग का आधुनिक चमत्कार
लगभग 3,030 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह पुल अपनी तरह का अनूठा प्रोजेक्ट है। यह गुवाहाटी को उत्तर-गुवाहाटी से जोड़ता है, जिससे दशकों पुरानी यातायात की समस्या का समाधान हो गया है।
दूरी और समय की बचत
2.86 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन पुल अब घंटों के सफर को मिनटों में बदल देगा। पहले जहां गुवाहाटी के दोनों छोरों के बीच यात्रा में काफी समय लगता था, अब यह दूरी मात्र 7 मिनट में तय की जा सकेगी।
अत्याधुनिक तकनीक
यह पूर्वोत्तर भारत का पहला ‘एक्स्ट्राडोज्ड पीएससी (Pre-stressed Concrete) ब्रिज’ है। इसमें हाई-परफॉर्मेंस स्टे केबल्स का उपयोग किया गया है, जो इसकी मजबूती को कई गुना बढ़ा देते हैं।
सुरक्षा और तकनीक का बेजोड़ संगम
असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से काफी संवेदनशील (Seismic Zone V) माने जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए इस पुल के निर्माण में विश्व स्तरीय सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है:
बेस आइसोलेशन तकनीक
पुल में ‘फ्रिक्शन पेंडुलम बेयरिंग्स’ का इस्तेमाल किया गया है, जो बड़े से बड़े भूकंप के झटकों को सहने की क्षमता रखते हैं।
ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS)
यह पुल के स्वास्थ्य की रियल-टाइम निगरानी करता है। किसी भी प्रकार की छोटी-मोटी क्षति या असामान्यता का पता यह सिस्टम तुरंत लगा लेता है, जिससे समय रहते रखरखाव संभव हो पाता है।
रणनीतिक मजबूती
मोरान में इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा
पुल के उद्घाटन से पहले, प्रधानमंत्री ने डिब्रूगढ़ जिले के मोरान में राष्ट्रीय राजमार्ग पर इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा (ELF) का भी उद्घाटन किया। यह पूर्वोत्तर भारत का पहला ऐसा हाईवे स्ट्रेच है जिसे जरूरत पड़ने पर रनवे में बदला जा सकता है।
वायुसेना का शक्ति प्रदर्शन
इस अवसर पर भारतीय वायुसेना के राफेल, सुखोई और मिग जैसे लड़ाकू विमानों ने आसमान में अपना दम दिखाया। यह एयर शो न केवल रोमांचक था बल्कि दुश्मनों के लिए एक सख्त संदेश भी था।
बैकअप प्लान
4.2 किलोमीटर लंबा यह स्ट्रेच डिब्रूगढ़ एयरपोर्ट या छाबुआ एयर फोर्स स्टेशन के किसी कारणवश अनुपलब्ध होने पर सैन्य और नागरिक विमानों के लिए एक विश्वसनीय विकल्प प्रदान करेगा।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
इस कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय जनता और व्यापारियों को मिलेगा। उत्तर-गुवाहाटी में रहने वाले हजारों लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर अब सुगम हो जाएंगे। साथ ही, पूर्वोत्तर के सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की त्वरित आवाजाही और रसद आपूर्ति में भी यह सेतु और ELF क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी का यह विजन ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को और मजबूती प्रदान करता है, जहां बुनियादी ढांचे का विकास क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की नींव रख रहा है।
Positive Takeaway
कुमार भास्कर वर्मा सेतु और मोरान का इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रेच आधुनिक भारत के संकल्पों का प्रतीक हैं। यह न केवल असम की कनेक्टिविटी को सुधारेगा, बल्कि रक्षा और विकास के बीच एक नया संतुलन पैदा करेगा। करीब 1 लाख लोगों की मौजूदगी में हुआ यह उद्घाटन इस बात का गवाह है कि असम अब विकास की नई उड़ान भरने के लिए तैयार है।

