Dashahara 2024: इस गांव में नहीं जलाया जाता रावण, जानें क्यों?

Dashahara 2024: छत्तीसगढ़ में कई जाति और समुदाय के लोग रहते हैं। त्योहारो को मनाने का सबका अपना अलग तरीका है। छत्तीसगढ़ के गांवों में काफी एकता होती है। पूरे गांव के लोग पीढ़ियों तक पुरानी परंपरा को निभाते चले आते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण पेश करता है मुंगेली जिला का गांव ‘कंतेली’। यहां दशहरे पर ना रावण का पुतला बनता है और ना ही रावण दहन होता है। आइए जानते हैं कंतेली गांव के अनोखे दशहरे के बारे में।  

दशहरे पर निकली है राजा की सवारी

कंतेली पर रावण दहन नहीं होता पर दशहरे के दिन गांव में त्योहार की तरह ही रौनक होती है। यहां दशहरे(Dashahara 2024) के दिन राजा की सवारी निकाली जाती है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं गांव में यह परंपरा 16वीं सदी से चली आ रही है। पहले के समय में राजा इसी दिन प्रजा का हाल जानने गांवों में घूमते थे। उसी परंपरा को राजा की वर्तमान पीढ़ी भी निभा रही है।

कुल देवी की होती है पूजा

यशवंत सिंह को आज भी यहां के राजा का दर्जा दिया जाता है। दशहरे के दिन अपने महल से राजा सवारी निकालते हैं। गांव के लोग भी सवारी के साथ-साथ नाचते गाते  चलते हैं। गांव घूमने के बाद सवारी कुल देवी के मंदिर पहुंचती है। यहां राजा कुल देवी मां महालक्ष्मी महासरस्वती और महाकाली की पूजा कर गांव की खुशहाली की कामना करते हैं।

44 गांव के लोग होते हैं जमा

दशहरे (Dashahara 2024) के दिन की चली आ रही इस परंपरा को देखने के लिए 44 गांवों के लोग जमा होते हैं। हालांकी यहां कभी भी रावण दहन नहीं होता। लेकिन दशहरे पर बड़ा मेला लगता है। इस दिन राजमहल में राजा गांव वालों के लिए दरबार भी लगाते हैं। जहां गांव के लोग राजा को सोन पत्ती भेंट करके उनका आशीर्वाद लेते हैं।

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Rishita Diwan

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