Caste census 2026: देश में फिर शुरू होगी जनगणना!

Caste census 2026: भारत में लंबे समय से टल रही जातिगत जनगणना अब तय तारीखों के साथ फिर से सुर्खियों में है। भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि जातीय जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी, जिसमें पहला चरण 1 अक्टूबर 2026 से और दूसरा चरण 1 मार्च 2027 से शुरू होगा।

दो चरणों में होगी जनगणना

सरकार के मुताबिक जनगणना को दो फेज में करवाया जाएगा

  • Phase 1 (अक्टूबर 2026): उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे पहाड़ी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों में शुरू होगा।
  • Phase 2 (मार्च 2027): बाकी राज्यों और क्षेत्रों में जनगणना का काम होगा।

जनगणना की reference date यानी आधार तारीख इन क्षेत्रों के लिए अलग-अलग रखी गई है ताकि मौसम की परिस्थितियों के अनुसार सही डेटा लिया जा सके।

क्या है जनगणना का कानूनी आधार?

भारत की जनगणना जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत कराई जाती है। जनसंख्या से जुड़े ये आंकड़े केवल संख्या नहीं बल्कि नीतियों, योजनाओं और सामाजिक न्याय की नींव होते हैं।

कोविड की वजह से हुआ था ब्रेक

आपको याद होगा कि जनगणना 2021 की पूरी तैयारी हो चुकी थी और अप्रैल 2020 से इसकी शुरुआत होनी थी। लेकिन कोविड-19 की महामारी ने इस प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया था। अब लगभग छह साल बाद एक नई जनगणना की घोषणा ने सामाजिक विश्लेषकों और नीति निर्माताओं की उम्मीदें फिर से जगा दी हैं।

जातिगत जनगणना क्यों  जरूरी?

जातिगत जनगणना से सरकार को देश के सामाजिक ढांचे की असल तस्वीर मिलती है। इससे यह जानना आसान होता है कि कौन-से वर्ग आज भी पिछड़े हुए हैं और किसे ज्यादा सहायता की जरूरत है। इससे आरक्षण नीति, शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक विकास की योजनाएं और भी बेहतर बनाई जा सकती हैं।

किस तारीख को क्या होगा?

सरकार ने यह भी बताया कि 16 जून 2025 को राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित की जाएगी, जो इस प्रक्रिया की आधिकारिक शुरुआत होगी।

2011 में आखिरी जनगणना

भारत में पिछली जनगणना 2011 में कराई गई थी, जिसमें दो फेज में मकान सूचीकरण और जनगणना का काम हुआ था। अब 2026-27 की जनगणना में न सिर्फ संख्या बल्कि जातिगत आंकड़े भी इकट्ठा किए जाएंगे, जो सामाजिक नीतियों को नया दिशा देंगे।

Positive सार

जातिगत जनगणना सिर्फ आंकड़ों की गिनती नहीं है, यह एक समाजिक आईना है, जिससे सरकार को देश की जमीनी हकीकत समझने में मदद मिलती है। यह कदम देश को एक inclusive और equitable समाज की ओर ले जा सकता है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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