Budget Halwa Ceremony 2025: बजट पूर्व संसद में क्यों बनता है हलवा?

Budget Halwa Ceremony 2025: बजट पूर्व संसद में क्यों बनता है हलवा? दरअसल भारतीय बजट पेश करने की प्रक्रिया में एक अनोखी और पुरानी परंपरा है जिसे “हलवा सेरेमनी” कहा जाता है। यह सेरेमनी बजट पेश करने से कुछ दिन पहले वित्त मंत्रालय में आयोजित की जाती है। यह परंपरा सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भावनात्मक कारण हैं। साल 2025 का बजट वित्त मंत्री 1 फरवरी को सुबह 11 बजे पेश करेंगी

हलवा सेरेमनी की परंपरा

बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए, वित्त मंत्रालय के कर्मचारी और अधिकारी कुछ दिनों के लिए मंत्रालय में ही रहते हैं। वे अपने परिवार और बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं ताकि बजट से संबंधित किसी भी जानकारी का रिसाव न हो सके। इस कठिन और तनावपूर्ण समय की शुरुआत को उत्सव का रूप देने के लिए हलवा सेरेमनी आयोजित की जाती है।

क्यों हलवा?

हलवा, एक मिठाई है जो भारतीय परंपरा में खास स्थान रखती है। यह मिठाई शुभ कार्यों की शुरुआत में बनाई जाती है। हलवा सेरेमनी में, वित्त मंत्री स्वयं हलवा बनाते हैं और इसे सभी कर्मचारियों में बांटते हैं। इस प्रक्रिया में एकता और टीम भावना का प्रतीकात्मक अर्थ छिपा होता है। हलवा सेरेमनी के माध्यम से कर्मचारियों के बीच सामूहिकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा दिया जाता है।

सेरेमनी का आयोजन

वित्त मंत्रालय के अंदर एक बड़े हॉल में इस सेरेमनी का आयोजन किया जाता है। इसमें वित्त मंत्री, मंत्रालय के उच्च अधिकारी और बजट की तैयारी में लगे सभी कर्मचारी शामिल होते हैं। हलवा बनाने का काम आरंभ होता है, और मिठाई की खुशबू पूरे मंत्रालय में फैल जाती है। वित्त मंत्री एक बड़े कड़ाही में हलवा बनाते हैं और सभी को परोसते हैं।

भावनात्मक पहलू

यह सेरेमनी कर्मचारियों के लिए एक तरह की मानसिक तैयारी भी होती है। बजट बनाने की प्रक्रिया में शामिल सभी लोग कई दिनों तक अपने परिवार से दूर रहते हैं और अत्यधिक मेहनत करते हैं। हलवा सेरेमनी उन्हें एकजुट करती है और यह संदेश देती है कि उनकी मेहनत और बलिदान को सराहा जाता है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

हलवा सेरेमनी की परंपरा कई दशकों पुरानी है। हालांकि इसके प्रारंभिक उद्देश्य और रूप में बदलाव आया है। पहले इसे एक सामान्य मिठाई बनाने की प्रक्रिया के रूप में देखा जाता था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और भावनात्मक परंपरा बन गई।

क्या सिखाती है ये परंपरा?

हलवा सेरेमनी सिर्फ एक मिठाई बनाने और खाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह एक गहरी परंपरा है जो भारतीय बजट प्रक्रिया की जड़ों में बसी है। यह परंपरा कर्मचारियों के बीच सामूहिकता, एकता और समर्पण की भावना को बढ़ावा देती है। इसके माध्यम से वित्त मंत्रालय के कर्मचारी अपनी कठिन और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ निभाने के लिए प्रेरित होते हैं।

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Rishita Diwan

Content Writer

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