Baba Saheb Ambedkar: डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। देश उन्हें संविधान निर्माता और समाज सुधारक के रूप में जानते हैं। 6 दिसंबर को पूरा देश उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। उनके आदर्शों को आत्मसात करके कोई भी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ प्रमुख पहलुओं के बारे में।
डॉ. अंबेडकर का संघर्ष
डॉ. अंबेडकर का जन्म महार जाति में हुआ था, जिसकी वजह से उन्हें बचपन से ही सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने इसे गुलामी से भी बदतर कहा और इसके खिलाफ संघर्ष करते हुए समाज में समानता लाने के लिए कई आंदोलन किए। 1950 के दशक में, बौद्ध धर्म से प्रभावित होकर उन्होंने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में बौद्ध धर्म अपना लिया। इस दौरान उन्होंने 22 प्रतिज्ञाएं लीं, जो उनके जीवन का एक अहम हिस्सा बन गईं।
शिक्षा और उपलब्धियां
डॉ. अंबेडकर ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। इसके अलावा, उन्होंने विधिशास्त्र, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र में गहन अध्ययन किया। उनकी निजी लाइब्रेरी “राजगृह” में 50,000 से ज्यादा किताबें थीं, जो दुनिया की सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी में से एक मानी जाती है। उन्होंने कमजोर और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
राजनीतिक सफर
डॉ. अंबेडकर ने 1926 से 1956 तक सक्रिय राजनीति में हिस्सा लिया।
- 1936 में उन्होंने स्वतंत्र लेबर पार्टी बनाई, जिसने 1937 के केंद्रीय विधान सभा चुनाव में 13 सीटें जीतीं।
- वे बॉम्बे विधान सभा के सदस्य और विपक्ष के नेता भी रहे।
- 15 अगस्त 1947 को भारत के आजाद होने पर उन्हें स्वतंत्र भारत का पहला कानून मंत्री बनाया गया।
- 29 अगस्त 1947 को, उन्हें संविधान ड्राफ्ट कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस दौरान उन्होंने 60 देशों के संविधान का अध्ययन कर भारतीय संविधान तैयार किया।
सामाजिक सुधार खिलाफ लड़ाई
डॉ. अंबेडकर ने जाति प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए अथक प्रयास किए।
- उन्होंने 1936 में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘एनीहिलेशन ऑफ कास्ट’ लिखी, जिसमें हिंदू धर्मग्रंथों और जाति व्यवस्था की आलोचना की।
- गांधी जी के दलितों को “हरिजन” कहने पर उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया।
- 1955 में बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने गांधी जी पर जाति व्यवस्था को लेकर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
बाबा साहेब की विरासत
डॉ. अंबेडकर ने संविधान में दलितों और कमजोर वर्गों को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए कई प्रावधान किए। उन्होंने समानता के अधिकार को सुनिश्चित करते हुए समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का सपना देखा।उनकी सोच और संघर्ष आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। बाबा साहेब का जीवन एक मिसाल है कि अगर दृढ़ संकल्प हो, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।