कौन हैं आर जी कर जिनके नाम पर है कोलकाता मेडिकल कॉलेज का नाम?

RG Kar: कुछ समय से कोलकाता का आरजी कर (rg kar medical college ) मेडिकल कॉलेज अस्पताल का नाम सूर्खियों में है। पर क्या आप जानते हैं आर जी कर कौन हैं जिनके नाम से इस मेडिकल कॉलेज का नाम रखा गया है। इस कॉलेज की स्थापना 1886 में हुई थी, यह एशिया का पहला प्राइवेट मेडिकल कॉलेज है। इसकी स्थापना डॉक्टर राधा गोविंद कर ने की थी और पूरे जीवनकाल तक वो यहां के सचिव के रूप में पदस्थ थे। उस समय मेडिकल कॉलेज की स्थापना इतनी आसान नहीं थी आइए जानते हैं किस तरह आरजी कर ने अपनी कठिन संघर्ष से इस अस्पताल की नींव रखी थी।  

डॉक्टर आरजी कर कौन थे ?

डॉक्टर आरजी कर का जन्म 23 अगस्त 1852 को हुआ था। उनके पिता भी एक डॉक्टर थे वहीं से उन्हें भी मेडिकल फिल्ड में जाने की प्रेरणा मिली। आरजी कर ने बंगाल मेडिकल कॉलेज से अपनी मेडिकल की पढ़ाई की थी जो उस समय एशिया का सबसे पुराना मेडिकल कॉलेज था। बाद में उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए एडिनबर्ग का रुख किया और 1886 में मेडिकल की हायर डिग्री लेकर भारत वापस आए। भारत आने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि यहां आम जनता के लिए मेडिकल डिग्री हासिल करना और अच्छी मेडिकल की सुविधा पाना आसान नहीं है। उनकी इसी सोच के कारण उन्होंने ‘द कलकत्ता स्कूल ऑफ मेडिसिन’ की स्थापना की।

अस्पताल के लिए आरजी कर का संघर्ष

हालांकी आरजी कर एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते थे लेकिन फिर भी उनकी सोच गरीबों और जरूरत मंदों को बेहतर मेडिकल सुविधा देने की थी। जिसकी वजह से उन्होंने मेडिकल कॉलेज खोलने की सोची। लेकिन इतनी बड़ी शुरुआत करने के लिए बड़ी रकम चाहिए थी जो उनके पास पर्याप्त मात्रा में नहीं थी। आरजी कर के परिवार के सदस्यों के मुताबिक उन्होंने अस्पताल के लिए सड़कों पर खड़े होकर भीख तक मांगी है। बाद में उनकी इस को कोशिश से प्रभावित होकर अंग्रेज सरकार ने उनकी बड़ी मदद की थी। धीरे-धीरे पूरे बंगाल से उनके लिए दान आने लगे और कॉलेज की स्थापना का रास्ता आसान होता चला गया।

बैठकखाना रोड से बेलगछिया तक का सफर

कॉलेज की शुरुआत बैठकखाना रोड पर एक किराए के भवन में हुई थी। उस समय कॉलेज के साथ कोई अस्पताल नहीं था, इसलिए छात्र इंटर्नशिप के लिए हावड़ा में 24-बेड वाले मेयो अस्पताल भेजे जाते थे। साल 1898 में बेलगछिया में 4 एकड़ जमीन खरीदी गई और भवन का निर्माण कराया गया। यह वही जगह है जहां अभी मेडिकल कॉलेज अस्पताल स्थित है। इसके चार साल बाद 1902 में लॉर्ड वुडबर्न ने 30 बेड वाले एक मंजिला अस्पताल का उद्घाटन किया, जिसका नाम यूके के शाही सदस्य प्रिंस अल्बर्ट विक्टर के नाम पर रखा गया। बाद में हॉस्पिटल बिल्डिंग में दो और फ्लोर बनाए गए। आज भी पुरानी बिल्डिंग उसी तरह है जैसी कि बनाई गई थी।

हॉस्पिटल को मिला आरजी कर का नाम

कलकत्ता स्कूल ऑफ मेडिसिन के नाम से शुरु हुए कॉलेज को 1904 में College of Physicians and Surgeons of Bengal के साथ मर्ज कर दिया गया। 1916 में कॉलेज का नाम ‘बेलगछिया मेडिकल कॉलेज’ कर दिया गया। इसके दो साल बाद ही 19 दिसंबर 1918 को डॉक्टर आरजी कर का निधन हो गया। डॉक्टर राधा गोविंद के प्रयासों के सम्मान में आजादी के बाद 12 मई 1948 को कॉलेज का नाम इसके संस्थापक डॉ. आरजी कर के नाम पर कर दिया गया जो आज उनके नाम से संचालित है।

Positive सार

आर जी मेडिकल कॉलेज को एशिया का पहला प्राइवेट मेडिकल कॉलेज होने का सम्मान प्राप्त है। आरजी कर  कॉलेज वेस्ट बैंगॉल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस से संबद्द है और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त है। आरजी कर कॉलेज में MBBS, MS/MD और अलग-अलग विषयों में पोस्ट-डॉक्टरेट (DM/MCh), पीजी डिप्लोमा और फेलोशिप कार्यक्रम संचालित कराती है। 

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