

भारत के उत्तराखंड को धरती का स्वर्ग कहते हैं। खूबसूरती के मामले में इस राज्य का कोई जवाब नहीं है। पर्यटन की दृष्टि से भी उत्तराखंड काफी रिच है। यहां कुल 6 नेशनल पार्क हैं जिनमें, जिम कार्बेट, राजाजी, गोविंद, गंगोत्री, नंदा देवी और वैली ऑफ फ्लॉवर्स शामिल हैं। इनमें से वैली ऑफ फ्लॉवर्स यानी फूलों की घाटी किसी आश्चर्य से कम नहीं है। साल के ज्यादातर समय बर्फ से ढंके होने वाले इस वैली को सिर्फ 4-5 महीने के लिए पर्यटकों के लिए खोला जाता है। साल 2023 में यह 1 जून से इसे खुलने वाला है। इस लेख के माध्यम से आज हम इसी के बारे में विस्तार से जानेंगे….
विश्व विरासत है वैली ऑफ फ्लॉवर्स
वैली ऑफ फ्लॉवर्स यूनेस्को की विश्व विरासत में अपना स्थान दर्ज करवा चुकी है। काफी ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से यह साल में 7-8 महीने बर्फ से ढंका होता है। पर्यटकों और नेचर लवर्स के लिए यह 4-5 महीने के लिए खुलता है।
ऋषिकेश से 250 किमी की दूरी पर है जोशीमठ, यहीं से 15 किमी दूर जाने पर गोविंदघाट मिलता है। पूरा रास्ता गंगा और अलकनंदा के साथ-साथ आगे जाता है, जिसकी खूबसूरती शब्दों में बयां नहीं हो सकती है। इस रास्ते पर्यटक पंचप्रयागों के दर्शन करने का मौका पाता हैं। ये पंचप्रयाग यानी कि देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग और विष्णुप्रयाग। गोविंदघाट से बद्रीनाथ केवल 25 किमी की दूरी पर ही है। लेकिन फूलों की घाटी का रास्ता गोविंदघाट से अलग हो जाता है।
गोविंदघाट से 5 किमी की दूरी पर है पुलना नाम का छोटा सा गांव। सड़क यहीं तक है। यहां से रास्ता पैदल तय करना होता है। पैदल जाने के लिए रास्ता ठीक है। पुलना समुद्र तल से 2100 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। यहीं से 9 किमी आगे
घांघरिया नाम की एक जगह है, जो समुद्र तल से 3100 मीटर ऊपर है। पुलना से घांघरिया तक की यह चढ़ाई काफी मुश्किल होती है। लेकिन प्राकृतिक दृश्य इतने खूबसूरत हैं कि यहां थकान महसूस ही नहीं होगी।
घांघरिया में स्थानीय बाजार, ठहरने के लिए अच्छे होटल की सुविधा है। भोजन के लिए भी यहां अच्छी जगहें हैं। गोविंदघाट से सुबह चलने पर घांघरिया पहुंचने तक शाम हो जाती है, यही वजह है कि घांघरिया में रात रुकने की सलाह दी जाती है।
गोविंदघाट से होते हुए हेमकुंड साहिब तक पहुंचा जाता है। 4200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह एक पवित्र झील है, यहां स्थित गुरुद्वारे में मत्था टेकने देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस साल 20 मई को हेमकुंड साहिब के कपाट खुले थे।
गोविंदघाट से दूसरा रास्ता फूलों की घाटी की तरफ मुड़ता है यही है फूलों की घाटी, जिसे जानकार स्वर्ग सा रास्ता भी कहते हैं, इस रास्ते पर अनगिनत प्रजातियों के फूल देखने को मिलते हैं। विभिन्न प्रकार के ऑर्किड, पॉपी, प्रिमुला, मैरीगोल्ड, बुरांश, गुलाब, गेंदा समेत 500 से ज्यादा प्रजातियों के फूल इस वैली की खूबसूरती हैं। घाटी के बहुत से फूल दवा के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।