DIWALI: खुशी, उत्साह और उमंग का दीपोत्सव, त्यौहार है हमारी समृद्ध परंपरा का प्रतीक!



हिंदुओं के सबसे बड़े त्यौहार शुरू हो चुकी है। दीपोत्सव का यह त्यौहार कई मायनों में खास है। उमंग, उत्साह, खुशी और हमारी मान्यताओं व समृद्द परंपराओं का प्रतीक है। आज दिनभर खरीदारी होगी। शाम को धन्वंतरि पूजा और यम के लिए दीपदान किया जाएगा। धनतेरस के बाद ही पांच दिनों का दीपोत्सव पर्व की शुरूआत हो जाती है। इस दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि धरती पर प्रकट हुए थे। इसलिए इनकी पूजा की जाती है। धनतेरस पर खासतौर से बर्तन और सोना खरीदने की भी परंपरा निभाई जाती है।

अपने साथ अमृत लाए थे धन्वंतरि

समुद्र मंथन की कहानी के अनुसार महर्षि दुर्वासा के श्राप की वजह से स्वर्ग श्रीहीन हो गया था, देवलोक के सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे। उन्होंने देवताओं से असुरों के साथ समुद्र मंथन करने को कहा। और उन्होंने बताया कि इससे अमृत निकलेगा और समृद्धि बरसेगी।

देवताओं ने यह बात जब असुरों के राजा बलि से कही वे भी मंथन के लिए मान गए इस मंथन से ही लक्ष्मी, चंद्रमा और अप्सराओं के बाद धन्वंतरि कलश में अमृत लेकर बाहर आए थे। धन्वंतरि त्रयोदशी को अमृत कलश के साथ समुद्र मंथन से बाहर निकले थे। यानी समुद्र मंथन का फल इसी दिन मिला था। यही वजह है कि दिवाली का उत्सव यहीं से शुरू होता है।

बर्तन और सोना खरीदना शुभ

धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक माना गया है। विष्णु पुराण में निरोगी काया को ही सबसे बड़ा धन कहा गया है। धन्वंतरि त्रयोदशी के दिन ही अमृत कलश लेकर आए थे।

भगवान धन्वंतरी सोने के कलश के साथ प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन बर्तन और सोना-चांदी खरीदने की परंपरा निभाई जाती है। पांच दिन का दीप उत्सव भी धनतेरस से ही शुरू हो जाता है।

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Dr. Kirti Sisodia

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