Pali Shiv Mandir: रहस्य जानकर रह जाएंगे हैरान!

ये कहानी शुरू होती है आज से करीब 1200 साल पहले, 9वीं शताब्दी में। कोरबा जिले से 60 किलोमीटर दूर, जब बाणवंशी राजा विक्रमादित्य जिन्हें इतिहास में ‘जयमेयू’ के नाम से भी जाना जाता है….उन्होंने इस मंदिर की नींव रखी। सन 870 से 900 ईस्वी के बीच बना यह मंदिर महज़ एक ढांचा नहीं, बल्कि एक ‘विजय स्मारक’ था। लोककथाएं कहती हैं कि राजा ने एक भीषण युद्ध जीतने के बाद भगवान शिव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए इस अद्भुत मंदिर का निर्माण कराया था। लेकिन समय बीतता गया और 11वीं शताब्दी में कलचुरी वंश के प्रतापी राजा जाज्वल्य देव प्रथम ने इसका जीर्णोद्धार कराया, जिससे इसकी चमक सदियों तक बरकरार रही।

खजुराहो से भी सुंदर नक्काशी?

जैसे ही आप इस मंदिर के ऊंचे चबूतरे पर कदम रखते हैं, आपकी नज़रें इसकी दीवारों पर टिक जाती हैं। बलुआ पत्थरों पर की गई नक्काशी इतनी बारीक है कि इसे देखकर आपको राजस्थान के माउंट आबू या खजुराहो की याद आ जाएगी।

गौर से देखिए इन दीवारों को यहाँ सिर्फ देवी-देवता ही नहीं, बल्कि उस दौर के इंसानी जीवन की झलकियां भी उकेरी गई हैं। कहीं कोई नर्तकी ताल पर थिरक रही है, तो कहीं कोई वादक अपनी धुन में मग्न है। एक दीवार पर तो ऐसा दृश्य है जो आपको हैरान कर देगा एक शरारती वानर एक स्त्री के गीले वस्त्र खींच रहा है, जबकि दूसरी ओर एक स्त्री अपनी मांग में सिंदूर भर रही है। ये पत्थर नहीं हैं, ये 9वीं सदी के समाज का एक जीता-जागता एल्बम है।

अब चलते हैं मंदिर के उस हिस्से में, जहाँ कदम रखते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं गर्भगृह। आमतौर पर शिव मंदिर में सिर्फ एक शिवलिंग होता है, लेकिन यहाँ की कहानी अलग है। यहाँ त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों ही शिवलिंग के रूप में स्थापित हैं। ये अपने आप में पूरे भारत में दुर्लभ है। इसके पीछे एक रोचक थ्योरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि शायद प्राचीन काल में युद्ध के दौरान जब पास के दो मंदिर नष्ट हो गए होंगे, तो उन शिवलिंगों को सुरक्षित रखने के लिए इसी एक गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया। आज ये तीनों दिव्य शक्तियां एक साथ मिलकर भक्तों की मुरादें पूरी करती हैं।

गर्भगृह का जादुई द्वार

गर्भगृह की चौखट पर चार अलग-अलग परतें यानी ‘शाखाएं’ हैं। पहली परत फूलों की बेलों से सजी है, दूसरी में नर्तक झूम रहे हैं, और तीसरी में प्रेमी युगलों की सुंदर मूर्तियाँ हैं। द्वार के नीचे साक्षात मां गंगा अपने मकर पर और मां यमुना अपने कच्छप पर खड़ी होकर पहरा दे रही हैं। उनके ऊपर ऋषि-मुनि यज्ञ कर रहे हैं। मंदिर के ऊपरी हिस्से में भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी उमा के साथ विराजमान हैं, और उनके साथ नवग्रहों की पूरी टोली पहरा दे रही है। ऐसा लगता है जैसे पूरा ब्रह्मांड ही इस द्वार पर उतर आया हो।

विडियो में पूरा देखें

Avatar photo

Rishita Diwan

Content Writer

ALSO READ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Owner/Editor In Chief: Dr.Kirti Sisodia 
Devendra Nagar, Raipur, Chhattisgarh 492001
Mob. – 6232190022

Email – Hello@seepositive.in

GET OUR POSITIVE STORIES