

भारत सरकार द्वारा इस साल 106 हस्तियों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इनमें से 6 को पद्म विभूषण, 9 को पद्म भूषण और 91 को पद्म श्री सम्मान दिया गया है। पुरष्कारों की इस लिस्ट में 19 महिलाएं भी शामिल हैं। इन महिलाओं में गुजरात की हीराबाई भी शामिल हैं जो भारत की गौरव हैं। दरअसल गुजरात स्थित गिर के सोमनाथ जिले के जांबुर गांव की रहने वाली हैं हीराबाई लोधी, उनका संबंध अफ्रिकी मूल के सीद्दी समाज से है।
सिद्दी समाज के उत्थान के लिए किया कार्य
दरअसल, सैकड़ों साल पहले हैदराबाद के जूनागढ़ के नवाब ने अफ्रिका की इस आदिवासी जाति के लोगों को भारत में बसाया था, इन्हें ही आज सीद्दी समुदाय के तौर पर जाना जाता हैं। इस समुदाय के लोग गुजरात के गीर के जंगल में रहते हैं। हीरबाई लोधी भी इसी समाज से संबंध रखती है। हीराबाई की lखुद काफी कम पढ़ी लिखी हैं, लेकिन सीद्दी समुदाय के लोगों के जीवन में उन्होंने शिक्षा की लौ जलाई।
उन्होंने अपने समाज में शिक्षा के प्रमाण को बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया है। वे खुद यहां के लड़के और लड़कियों को शिक्षा दिलाने के लिए लगातार प्रयास करती रहती है।
यही नहीं उन्होंने सीद्दी महिलाओं को रोजगार दिलाने और सामाजिक कार्यों के जरिए समाज में बदलाव लाने के लिए भी काफी काम किया है। उनके इसी योगदान के लिए अब केन्द्र सरकार ने उन्हें सम्मानित किया है।
काफी संघर्षों के बाद किया मुकाम हासिल
हीराबाई को भले ही आज पूरी दुनिया जान रही है लेकिन उनकी शुरूआत काफी संघर्षपूर्ण था। 14 साल की उम्र में हीरबाई की शादी हो गई। अपने जीवन और आस पास के लोगों की परेशानियों को देखते हुए उन्होंने तय किया की वे अपना जीवन सीद्दी समाज को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित कर देंगी।
रेडियो बना सहारा
उन्होंने अपनी शुरआत रेडियो से की, उनके लिए प्रेरणा का स्त्रोत बना रेडियो कार्यक्रम, जिसके जरिए वे सरकार की योजनाओं की जानाकरी और विकास के कार्यक्रमों की जानकारी हासिल कर अपनी मुहिम को आगे बढ़ाया।
पढ़ी-लिखी ना होने के बावजूद सरकार की योजनाओं की जानकारी लिए वे गांधीनगर स्थित सचिवालय के कई चक्कर लगाती थीं। समाज के पुरुषों के जरिए कई बार हीरबाई का विरोध किया, उनके रास्ते में परेशानियां खड़ी की। लेकिन महिलाओं के लिए कुछ करने की उनकी चाह ने आज इस पूरे इलाके में शिक्षा की एक नई ज्योति जलाई है।
महिलाओं को बैंक से जोड़ा समझाया वित्तीय अधिकार
उन्होंने गांव की महिलाओं में वित्तीय अधिकारों की समझ विकसित की, उन्हें बैंकों से जोड़ा। छोटी-छोटी बचत से महिलाओं के लिए एक मंडली की शुरुआत की।
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