पहले से ज्यादा ताकतवर हुई इंडियन नेवी, पानी के अंदर माइंस बिछाने में सक्षम हुआ भारत!



  • बढ़ी इंडियन नेवी की ताकत
  • वागीर सबमरीन की समुद्र में टेस्टिंग
  • रडार की पकड़ में नहीं आती वागीर सबमरीन

18 मई 2023 भारतीय नेवी के लिए यादगार दिन होगा, इस दिन वागीर सबमरीन का समुद्र में टेस्ट शुरू किया जायेगा, जिससे भारतीय नेवी और ताकतवर होगी। ये सबमरीन एंटी शिप मिसाइल और टारपीडो से युक्त है। इस इसकी की खास बात ये है कि यह दुश्मन के रडार में पकड़ भी नहीं आएगी। समुद्र में कई राउंड की टेस्टिंग के बाद अगले साल यह भारतीय नेवी के लड़ाकू बेड़े में शामिल हो सकती है।

वागीर सबमरीन की खास बात

वागीर सबमरीन का नाम सैंड फिश की एक प्रजाति पर है, जो कि हिंद महासागर एक घातक समुद्री शिकारी है। इसे साइलेंट किलर भी कहते हैं। इसने दूसरी पनडुब्बियों के मुकाबले सबसे कम समय में हथियार और सेंसर के प्रमुख ट्रायल्स को पूरा किया है।

इसके अलावा यह सबमरीन एंटी-सरफेस वॉरफेयर और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर दोनों जगह काम करने में पूरी तरह सक्षम है। खुफिया जानकारी जुटाना, माइंस बिछाने और एरिया सर्विलांस का काम भी वागीर सबमरीन बखूबी कर सकती है।

वागीर सबमरीन की बनावट

21 मीटर ऊंची और 221 फीट लंबी वागीर पनडुब्बी पानी के ऊपर 20 किलोमीटर प्रति घंटे और पानी के अंदर 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है।

वागीर सबमरीन में लगभग 40 क्रू एक साथ काम कर सकेंगे। इसमें करीब 9-10 ऑफिसर हैं। सबमरीन में खाली स्पेस बेहद कम होता है। इस वजह से अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है। तीन-तीन घंटे की ड्यूटी के बाद जवान 6 घंटे का ब्रेक ले सकते हैं।

भारतीय सबमरीन का इतिहास

वागीर सबमरीन अप्रैल 2022 को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के कान्होजी आंग्रे वेट बेसिन से लॉन्च हुआ था। यह प्रोजेक्ट 75 के तहत बनने वाली छठवीं सबमरीन है। पहली सबमरीन दिसंबर 1974 में इंडियन नेवी में कमीशन हुआ था और अप्रैल 1997 में उसे रिटायर किया गया।

इसके बाद सबमरीन INS कलवरी इंडियन नेवी में दिसंबर 2017 में शामिल हुआ था। तीसरी सबमरीन INS खंडेरी को सितंबर 2019 में, चौथी सबमरीन INS करंज को मार्च 2021 में और पांचवीं INS वेला को नवंबर 2021 में सेवा में लाया गया।

प्रोजेक्ट 75 के बारे में…

इंद्रकुमार गुजराल के सरकार में 25 पनडुब्बियां नेवी को देने का फैसला लिया गया, इसके लिए प्रोजेक्ट 75 तैयार किया गया। इस प्रोजेक्ट के तहत पनडुब्बियों को बनाने के लिए 30 साल की योजना तैयार की गई। 2005 में, भारत और फ्रांस ने छह स्कॉर्पीन डिजाइन की पनडुब्बियां बनाने के लिए 3.75 अरब डॉलर का करार किया।

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Dr. Kirti Sisodia

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