Chapda Chati of Bastar: क्या है चापड़ा चटनी जिसमें छिपे हैं कई औषधीय गुण

Chapda Chati of Bastar: छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य प्रदेश माना जाता है। यहां के आदिवासियों की संस्कृति, सभ्यता और खानपान काफी अलग होते हैं। लेकिन आदिवासियों से जुड़ी हर एक चीज के पीछे कोई ना कोई तथ्य जरूर होता है। यहां हम आपको इनके खानपान से जुड़ी कुछ ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में पढ़कर हो सकता है आप उसे खाने की सोच भी ना सके। लेकिन उसकी औषधीय गुणों के बारे में जानकर आप भी मान जाएंगे कि आदिवासियों को प्रकृती ने स्वास्थ्य का खजाना सौंपा हुआ है।

लाल चीटियों की चटनी?

जी हां हम जिस व्यंजन के बारे में बात कर रहे हैं वो लाला चीटियों से बनी ‘चापड़ा चटनी’ (chapda chatni) है। इस चटनी को जिंदा लाल चीटियों को पकड़कर बनाया जाता है। सुनने में आपको जितनी अजीब लगे पर ये चटनी सेहत से भरपूर होती है। यह चटनी आपको महंगे से महंगे होटल्स में नहीं मिलेगी। अगर आप भी इसका स्वाद चखना चाहते हैं तो आपको छत्तीसगढ़ के बस्तर आना होगा। चापड़ा चटनी बस्तर के आदिवासियों के पारंपरिक खान-पान का हिस्सा है।

कैसे बनती है  चापड़ा चटनी ?

चापड़ा चटनी (Chapda Chati of Bastar) जिन चीटियों से बनती है वो पेड़ों की पत्तियों में पाई जाती हैं। खास कर उन पेड़ों पर जिनपर मीठे फल लगते हैं जैसे आम, अमरूद और साल। इसके लिए सबसे पहले चीटियों को घोंसले के साथ ही पेड़ से उतार लिया जाता है। इन्हें झड़ाकर या पानी में डुबाकर पत्तियों से अलग कर लिया जाता है। इसके बाद इन्हें नमक, लाल मिर्च के साथ पत्थर के सील बट्टे पर पीसा जाता है। इस चटनी को स्वाद बढ़ाने के लिए टामाटर, हरा धनिया, लहसुन के साथ भी बनाया जाता है।

क्यों कहते हैं चापड़ा चटनी?

बस्तर बाजार (bastar bazar) में यह चटनी खूब बिकती है। बाजार में इस चटनी को पत्ते से बनी छोटी टोकरी में दिया जाता है जिसे पांरपरिक बोली में ‘चापड़ा’ कहते हैं। इस चटनी को इन्हीं टोकरियों में बेचा जाता है इसलिए इसका नाम चपाड़ा चटनी पड़ा।(bastar bazar) बाजार में यह चटनी पांच से दस रुपए में मिल जाती है।

चापड़ चटनी में हैं कई औषधीय गुण

सुनने में यह चटनी (Chapda Chati of Bastar)अटपटी जरूर लगती है। लेकिन ये चटनी कई औषधीय गुणों से भरपूर होती है। चीटियों में प्राकृतिक रूप से फार्मिक एसिड होता है। फार्मिक चटनी ही इस चटनी के स्वाद को चटपटा बनाता है। आदिवासी इस चटनी से मलेरिया, डेंगू, सर्दी, पीलिया, खांसी और आंत से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने में उपयोग करते हैं। चापड़ा चटनी भूख बढ़ाने मे भी मदद करता है। हालांकी मेडिकल साइंस ने अब तक इसे प्रमाणित नहीं किया है।

चीटी से बुखार का इलाज करते हैं आदिवासी

सिर्फ चटनी से ही नहीं आदिवासी इलाकों में इन लाल चीटियों को बुखार उतारने के लिए भी उपयोग किया जात है। जब किसी तो तेज बुखार होता है तो आदिवासी बीमार शख्स को उस पेड़ के नीचे बैठा देते हैं जिस पेड़ पर लाल चीटी होती है। जब लाल चीटी बीमार व्यक्ति को काटती है तो उसका बुखार उतर जाता है। बुखार

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Rishita Diwan

Content Writer

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