सोमनाथ स्वाभिमान पर्व
‘आक्रांता मिट गए, सोमनाथ खड़ा है’- पीएम मोदी
Somnath Swabhiman Parv: गुजरात के पावन तट पर स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव के सान्निध्य में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के गौरवशाली इतिहास और अटूट आस्था का उद्घोष किया। सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री ने न केवल महादेव की आराधना की, बल्कि मंदिर के पुनर्निर्माण और इसके संघर्षपूर्ण इतिहास को लेकर देश के सामने कई महत्वपूर्ण बातें रखीं।
पुनर्निर्माण का प्रतीक है सोमनाथ
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश या पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनरुत्थान का है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 1000 साल पहले आक्रांताओं ने सोचा था कि उन्होंने हमें जीत लिया है, लेकिन आज भी मंदिर पर फहरा रही धर्मध्वजा पूरी दुनिया को हिंदुस्तान की शक्ति और सामर्थ्य का परिचय दे रही है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि दुनिया के इतिहास में सृजन और जीवटता का ऐसा उदाहरण मिलना नामुमकिन है, जहाँ आक्रांता आते रहे और हर युग में सोमनाथ पुनः स्थापित होता रहा।
इतिहास को ‘व्हाइटवॉश’ करने की कोशिश
प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों और इतिहासकारों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आजादी के बाद भी गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने हमारी सांस्कृतिक विरासत से पल्ला झाड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि आक्रमण के इतिहास को कुछ राजनेताओं और इतिहासकारों ने ‘व्हाइटवॉश’ करने की कोशिश की, ताकि बलिदानियों के पराक्रम को भुलाया जा सके। सोमनाथ की रक्षा के लिए पूर्वजों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, लेकिन उन नायकों को वह महत्व नहीं दिया गया जिसके वे हकदार थे।
मजहबी कट्टरपंथ और सोमनाथ का ‘अमृत’
महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब तक का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मजहबी कट्टरपंथी यह कभी नहीं समझ पाए कि सोमनाथ के नाम में ही ‘अमृत’ छिपा है। उन्होंने कहा, “वे मजहबी कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि जिस सोमनाथ को वे नष्ट करना चाहते हैं, उसके ऊपर सदाशिव महादेव की वह चैतन्य शक्ति प्रतिष्ठित है जो कल्याणकारी भी है और अटूट शक्ति का स्रोत भी।” उनके अनुसार, आक्रांता आज इतिहास के कुछ पन्नों में सिमट गए हैं, जबकि सोमनाथ गगनचुंबी होकर खड़ा है।
विरोध वाली ताकतें आज भी सक्रिय
प्रधानमंत्री ने एक कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जो ताकतें 1951 में सोमनाथ पुनर्निर्माण के खिलाफ थीं, वे आज भी देश में मौजूद और सक्रिय हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे सरदार वल्लभभाई पटेल को रोकने की कोशिश की गई और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आगमन पर भी आपत्ति जताई गई। मोदी ने चेताया कि आज तलवारों की जगह दूसरे षड्यंत्रकारी तरीकों से भारत के खिलाफ साजिशें हो रही हैं, इसलिए देशवासियों को एकजुट और शक्तिशाली रहना होगा।
तुष्टीकरण की राजनीति पर कटाक्ष
अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने ‘तुष्टीकरण के ठेकेदारों’ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी सोच के आगे घुटने टेकने वाले लोग कभी भी धर्म के प्रति ईमानदार नहीं हो सकते। आज के भारत को अपनी विरासत पर गर्व है और वह अब किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक दमन को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
प्रधानमंत्री के संबोधन की 10 बड़ी बातें
- सोमनाथ मंदिर की ध्वजा हिंदुस्तान की शक्ति और अटूट आस्था का प्रतीक है।
- आक्रांता इतिहास के पन्नों में दब गए, लेकिन सोमनाथ आज भी अडिग है।
- यह मंदिर विनाश का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का जीवंत इतिहास है।
- आजादी के बाद भी गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने विरासत को भुलाने की कोशिश की।
- सोमनाथ की रक्षा के लिए दिए गए बलिदानों को जानबूझकर छिपाया गया।
- कट्टरपंथ कभी सोमनाथ की ‘चैतन्य शक्ति’ को नहीं हरा सका।
- तुष्टीकरण की राजनीति ने हमेशा कट्टरपंथी सोच का साथ दिया।
- सरदार पटेल और डॉ. राजेंद्र प्रसाद को मंदिर से जुड़े कार्यों के लिए रोका गया था।
- जो ताकतें 1951 में विरोध कर रही थीं, वे आज भी भारत के खिलाफ सक्रिय हैं।
- भारत के खिलाफ हो रहे नए षड्यंत्रों से बचने के लिए ‘एकजुटता’ ही एकमात्र विकल्प है।
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