PM Modi Parliament Speech: प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में क्या कहा?

  • PM Modi Parliament Speech
  • ईरान-इजरायल जंग पर पीएम मोदी का संसद में बड़ा बयान
  • 3.75 लाख भारतीयों की घर वापसी और सप्लाई चैन पर रणनीति

PM Modi Parliament Speech : पश्चिम एशिया (West Asia) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में देश को संबोधित करते हुए भारत की रणनीति और नागरिकों की सुरक्षा पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। पीएम मोदी का यह संबोधन न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति के भविष्य को भी दिशा देने वाला है।

धैर्य से चुनौतियों का सामना

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत देशवासियों को ढांढस बंधाते हुए की। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत ने कोरोना काल की अभूतपूर्व चुनौतियों का धैर्य और एकजुटता के साथ सामना किया था, ठीक उसी तरह वर्तमान वैश्विक संकट का भी मुकाबला किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ‘संवेदनशील’ भी है और ‘सतर्क’ भी।

3.75 लाख भारतीयों की सुरक्षित वापसी

संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। पीएम मोदी ने जानकारी दी कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है। भारतीय दूतावास लगातार एडवाइजरी जारी कर रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने स्वयं पश्चिम एशिया के राष्ट्राध्यक्षों से बात कर भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन लिया है।

हॉर्मुज स्ट्रेट और ऊर्जा सुरक्षा पर संकट

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) है। भारत की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर इसी रास्ते से आता है। युद्ध के कारण यह मार्ग चुनौतीपूर्ण हो गया है।

  • ऑयल और गैस भारत अपनी एलपीजी (LPG) जरूरत का 60% हिस्सा आयात करता है।
  • वैकल्पिक मार्ग सरकार गल्फ और आसपास के वैकल्पिक समुद्री रास्तों पर नजर बनाए हुए है ताकि पेट्रोल-डीजल की सप्लाई बाधित न हो।
  • घरेलू उत्पादन प्रधानमंत्री ने देश में उत्पादन बढ़ाने और सप्लायर्स के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया है।

किसानों और खाद की आपूर्ति पर मंथन

युद्ध का सीधा असर भारत के कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है क्योंकि खाद (Fertilizer) की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। इससे निपटने के लिए पीएम मोदी ने एक हाई-लेवल मीटिंग में अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर चर्चा की है। सरकार उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रही है ताकि किसानों को भविष्य में किसी किल्लत का सामना न करना पड़े।

ग्लोबल इकोनॉमी और भारत पर प्रभाव

प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि यह युद्ध केवल क्षेत्रीय नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत के इन देशों के साथ व्यापक व्यापारिक रिश्ते हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ती टेंशन से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ता है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विश्वास जताया कि मोदी सरकार विपरीत परिस्थितियों को अवसर में बदलने की कला जानती है।

विपक्ष का रुख

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री के इस संबोधन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जंग का देश पर व्यापक असर पड़ा है और यह चर्चा बहुत पहले होनी चाहिए थी, लेकिन प्रधानमंत्री का इस मुद्दे पर बोलना एक सकारात्मक कदम है।

Positive Takeaway

प्रधानमंत्री का लोकसभा में यह बयान दुनिया को एक संदेश है कि भारत शांति का पक्षधर है और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार की रणनीति स्पष्ट है: नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता।

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Rishita Diwan

Content Writer

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