PM Modi Jordan Visit: भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है जॉर्डन?

PM Modi Jordan Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की आधिकारिक यात्रा का पहला पड़ाव जॉर्डन था। 15 दिसंबर 2025 शाम को जॉर्डन की राजधानी अम्मान पहुँचने के साथ ही यह दौरा वैश्विक कूटनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। ऐतिहासिक दृष्टि से यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि भारत और जॉर्डन अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। जॉर्डन दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है, जिनके साथ स्वतंत्र भारत ने अपने शुरुआती दौर में ही मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित कर लिए थे।

ऐतिहासिक संबंधों की गहराई

PM Modi Jordan Visit

भारत और जॉर्डन के बीच मित्रता की नींव 1947 में पहले द्विपक्षीय समझौते के साथ रखी गई थी। 1950 में दोनों देशों ने पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए। जॉर्डन के हाशमी साम्राज्य और भारत के बीच दशकों से शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर नियमित संवाद बना रहा है। यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि उस भरोसे को मजबूती देने वाली है जो सात दशकों से अधिक समय से संचित है।

मध्य पूर्व का शांति स्तंभ

जॉर्डन का भौगोलिक स्थान उसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक ‘की-प्लेयर’ (Key Player) बनाता है। यह देश सऊदी अरब, सीरिया, इराक, फिलिस्तीन और मिस्र जैसी महत्वपूर्ण सीमाओं से घिरा हुआ है। प्राकृतिक संसाधनों की कमी के बावजूद, जॉर्डन ने मध्य पूर्व के सत्ता संघर्षों में हमेशा एक संतुलित और मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।

इजरायल के साथ 1994 में शांति संधि करने वाला दूसरा अरब देश होने के नाते, जॉर्डन क्षेत्रीय स्थिरता का एक प्रमुख स्तंभ है। साथ ही, लगभग 20 लाख फिलिस्तीनी और 14 लाख सीरियाई शरणार्थियों को आश्रय देकर जॉर्डन ने अपनी मानवीय प्रतिबद्धता को दुनिया के सामने साबित किया है।

आर्थिक रिश्तों की रीढ़

आर्थिक मोर्चे पर भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023-24 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 2.875 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा। भारत से जॉर्डन को मुख्य रूप से चावल, मांस, चाय और कॉफी जैसे खाद्य पदार्थों का निर्यात किया जाता है।

वहीं, भारत के कृषि क्षेत्र के लिए जॉर्डन अपरिहार्य है। भारत वहां से फॉस्फोरिक एसिड और कैल्शियम फॉस्फेट का बड़े पैमाने पर आयात करता है, जो भारत के उर्वरक और रसायन उद्योग के लिए ‘लाइफलाइन’ का काम करते हैं। इफ़्को (IFFCO) जैसी भारतीय कंपनियों और जॉर्डन फॉस्फेट माइनिंग कंपनी (JPMC) के बीच चल रही संयुक्त परियोजनाएं इस रिश्ते की आर्थिक गहराई को दर्शाती हैं।

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भारतीय प्रवासियों का योगदान

जॉर्डन और भारत के रिश्तों की असली मजबूती वहां रहने वाले करीब 25,000 से 30,000 भारतीय कामगार हैं। मुख्य रूप से कपड़ा, निर्माण और विनिर्माण क्षेत्रों में कार्यरत ये भारतीय नागरिक हर साल 25 से 35 करोड़ डॉलर की विदेशी मुद्रा भारत भेजते हैं। सेवा क्षेत्र और आईटी कंपनियों में भी भारतीयों की उपस्थिति उल्लेखनीय है, जो जॉर्डन की अर्थव्यवस्था में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

सांस्कृतिक जुड़ाव और सॉफ्ट पावर

जॉर्डन के घरों में बॉलीवुड फिल्मों और भारतीय अभिनेताओं के प्रति जबरदस्त दीवानगी है। हाल के वर्षों में जॉर्डन बॉलीवुड की पसंदीदा शूटिंग लोकेशन बनकर उभरा है। 2024 की फिल्म ‘बड़े मियां छोटे मियां’ और चर्चित फिल्म ‘आदुजीवितम’ की शूटिंग जॉर्डन की खूबसूरत वादियों में हुई है।

योग और वृक्षारोपण जैसे अभियानों ने भी दोनों देशों को करीब लाया है। सितंबर 2025 में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत इरबिद में किया गया वृक्षारोपण और राजकुमारी बसमा बिन्त अली के संरक्षण में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ इस सांस्कृतिक एकता के ताजा उदाहरण हैं।

Positive Takeaway

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की ‘एक्ट वेस्ट’ (Act West) नीति को और अधिक विस्तार देने वाली है। सप्लाई चेन पर बढ़ती निर्भरता और कामगारों की सुरक्षा जैसे मुद्दे इस यात्रा के केंद्र में हैं। जॉर्डन जैसे छोटे लेकिन प्रभावशाली देश के साथ भारत के रिश्ते यह साबित करते हैं कि नई दिल्ली की कूटनीति अब दूरगामी रणनीतिक हितों और साझा सांस्कृतिक मूल्यों पर मजबूती से टिकी हुई है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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