Loksabha Election 2024: क्या है व्हीप की ताकत, कैसे निभाता है महत्वपूर्ण भूमिका!

Loksabha Election 2024: देश में लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। प्रचार अभियान तेजी से हर राज्य में चल रहे हैं। देश की संसद लेकसभा और राज्यसभा में भी कई हलचल होने लगी है। ऐसे में हाल ही में व्हीप (Whip) को लेकर भी काफी बातचीत हो रही थी। इस आर्टिकल के जरिए हम जानेंगे कि क्या होता हैं व्हीप और और कब कैसे उसका इस्तेमाल होता है।

क्यों हैं चर्चा में?

दरअसल राज्यसभा चुनावों के लिए तीन राज्यों के विधायकों ने अपनी पार्टी को किनारे रखकर क्रॉसवोटिंग की। इसके बाद से ही ये चर्चा होने लगी कि पार्टियां व्हीप का इस्तेमाल कर सकती हैं या नहीं। व्हीप के जरिए राजनीतिक पार्टियां अहम मौकों पर अपने लोगों को खास दिशानिर्देश पालन करने के लिए कहती है।  

व्हिप क्या है?

व्हीप (Whip) अवधारणा को ब्रिटेन से लिया गया है। इसमें तहत संसद में व्हिप किसी पार्टी के सदस्यों के लिए लिखित आदेश देती है। पार्टियां इसलिए भी व्हीप जारी करती हैं, ताकि उसके सदस्य सदन में मौजूद रहकर वोटिंग कर पार्टी के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें। व्हिप जारी होते ही पार्टी के सदस्य पार्टी के लिए बंध जाते हैं। सदस्यों को इसे हर हाल में मानना होता है फिर चाहे वो सहमत हो या नहीं। हर पार्टी इसके लिए एक सदस्य को नियुक्त करती हैं जो चीफ व्हिप कहलाता है।

व्हीप का इतिहास

Loksabha Election 2024 की वजह से देश में चुनावी माहौल है। यही वजह है कि ये जरूर जानकारी आपको अपनी राजनीतिक पार्टियों से जुड़ी जाननी चाहिए। व्हिप शब्द पार्टी लाइन का पालन करने के लिए उपयोग किया जाता है। ये एक पुरानी ब्रिटिश प्रथा है। व्हीप शब्द” whipping ” से आया है। सामान्य तौर पर इसका मतलब सचेतक या मार्ग दिखाने वाला होता है।

कौन जारी करता है व्हिप?

भारत में सभी राजनीतिक पार्टियों को ये अधिकार होता है कि वो अपने सदस्यों को व्हिप जारी कर सके। पार्टियां व्हिप जारी करने के लिए सदन के सदस्यों में एक सबसे वरिष्ठ सदस्य मुख्य सचेतक होता है जिसे चीफ व्हिप कहते हैं। चीफ व्हीप अपने पार्टी के लोगों के लिए मौके पर व्हिप जारी करता है। व्हीप तीन तरह के होते हैं…

  • पहला- इसमें एक से तीन लाइनों में सीधे सीधे पार्टी सदस्यों को कहा जाता कि उन्हें क्या करना है? ये एक लाइन का व्हिप कहलाती है। पार्टी लाइन का पालन नहीं करने के मामले में व्हिप सदस्य को पार्टी त्यागने की अनुमति देता है।
  • दूसरा- ये व्हीप सदस्यों को वोट के दौरान मौजूद होने का निर्देश देता है।
  • तीसरा- ये आमतौर पर अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति में लागू किया जाता है। इसमें सदस्यों से सदन में मौजूद रहने और पार्टी लाइन का पालन करने का दायित्व दिया जाता है।

राजनीतिक प्रणाली में व्हिप का महत्व

सरकार के संसदीय रूप में व्हीप अनुशासन को प्रदर्शित करता है। विभिन्न राजनीतिक दलों के व्हिप लोकसभा, राज्यसभा या विधानसभा के अंदर पार्टियों के आंतरिक संगठन और अनुशासन को बनाए रखते हैं। व्हिप के जरिए पार्टी सदस्यों को गाइडलाइन दी जाती है।

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व्हीप से जुड़ी खास बातें

  • विधानसभा से लेकर लोकसभा और राज्यसभा में पार्टियां हाउस से संबंधित किसी भी मुद्दे पर व्हिप जारी करने का अधिकार रखती हैं।
  • इसमें विश्वास मत, अविश्वास मत, किसी बिल पर वोट देना जैसी बातें शामिल होती हैं। जिसका मतलब है कि सदन से जुड़े कामकाज या फिर विधायी मुद्दों पर कोई भी पार्टी अपने प्रतिनिधियों को पार्टी लाइन रहने के लिए व्हिप जारी कर सकती है, ये संविधानसम्मत माना गया है।
  • राज्यसभा चुनावों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों में पार्टी अपने सांसदों या विधायकों को व्हिप नहीं जारी कर सकते हैं।
  • ये संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत एक राजनीतिक पार्टी को अपने विधायकों को व्हिप जारी करने का संवैधानिक अधिकार दिया गया है। लेकिन 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि दसवीं अनुसूची का इस्तेमाल “विश्वास प्रस्ताव” या “अविश्वास” पर वोट तक ही रहेगा। या फिर जहां विचाराधीन प्रस्तावों के मामले हैं।

Positive सार

Loksabha Election 2024 का अगर आप भी हिस्सा बनने वाले हैं तो ये सबसे जरूरी है कि आपको पता हो कि आपके लोकतंत्र की जरूरी चीजें क्या हैं। व्हीप की जानकारी भी इनमें से एक थी। अगर आपको ये जानकारी पसंद आई तो हमें लिखें कि आपको और किस सब्जेक्ट पर रोचक और इंफॉर्मेटिव जानकारी चाहिए। हम आपके लिए लिखेंगे।

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Rishita Diwan

Content Writer

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