30 साल बाद ठाकरे परिवार मुंबई की सत्ता से बाहर
मुंबई में ऐतिहासिक बदलाव
BMC Election 2026: मुंबई की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो रही है। देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), के हालिया चुनावी रुझानों और परिणामों ने दशकों पुराने समीकरणों को बदल दिया है। पिछले 30 सालों से मुंबई की सत्ता की चाबी जिस ठाकरे परिवार के पास थी, वह अब उनके हाथों से फिसलती नजर आ रही है। आजादी के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुंबई में अपना मेयर बनाने की सबसे मजबूत स्थिति में पहुंच गई है।
30 साल का किला ढहा
ठाकरे परिवार के हाथ से गई सत्ता
मुंबई के इतिहास में 1992 से लेकर 2022 तक का समय शिवसेना (अविभाजित) और ठाकरे परिवार के दबदबे का रहा है। लेकिन इस बार के BMC चुनाव परिणामों ने कहानी बदल दी है। कुल 227 सीटों में से भाजपा गठबंधन ने 118 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इसमें भाजपा ने अकेले 89 सीटें जीती हैं, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 29 सीटों पर कब्जा किया है। यह जीत न केवल भाजपा के लिए बड़ी है, बल्कि ठाकरे परिवार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका भी है।
मेयर पद का गणित
कैसे होता है चुनाव?
मुंबई में मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं, बल्कि जनता द्वारा चुने गए पार्षदों (नगर सेवकों) के माध्यम से होता है।
- नगर सेवक: मुंबई के 227 वार्डों से पार्षद चुनकर आते हैं।
- बहुमत: जिस पार्टी के पास सबसे ज्यादा पार्षद होते हैं, उसका मेयर बनने का दावा सबसे मजबूत होता है।
- कार्यकाल: पार्षदों का कार्यकाल 5 साल का होता है, लेकिन मेयर की कुर्सी का कार्यकाल केवल 2.5 साल का होता है।
- आरक्षण (लॉटरी सिस्टम): मेयर किस वर्ग (महिला, ओबीसी, एससी या ओपन) से होगा, इसका फैसला चुनाव आयोग लॉटरी सिस्टम के जरिए करता है।
बीएमसी का बजट
कई राज्यों की जीडीपी से भी बड़ा
BMC को ‘एशिया की सबसे बड़ी सिविक बॉडी’ क्यों कहा जाता है, इसका अंदाजा इसके बजट से लगाया जा सकता है। वर्ष 2025-26 के लिए BMC का बजट लगभग 74,000 करोड़ रुपये है। यह राशि भारत के कई छोटे राज्यों के कुल बजट से भी कहीं अधिक है।
| राज्य/संस्था | बजट (2025-26) |
| BMC (मुंबई) | ₹74,000 करोड़ |
| हिमाचल प्रदेश | ₹58,514 करोड़ |
| अरुणाचल प्रदेश | ₹39,842 करोड़ |
| गोवा | ₹28,162 करोड़ |
| सिक्किम | ₹16,000 करोड़ |
मेयर बनाम कमिश्नर
किसके पास कितनी शक्ति?
अक्सर लोगों को लगता है कि मेयर शहर का सर्वेसर्वा होता है, लेकिन BMC के ढांचे में शक्तियां विभाजित हैं।
- मेयर- यह एक सम्मानजनक और औपचारिक पद है। मेयर नगर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और शहर का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- कमिश्नर- असली प्रशासनिक ताकत कमिश्नर के पास होती है, जो आमतौर पर एक IAS अधिकारी होते हैं। शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रोजेक्ट्स, बजट का क्रियान्वयन और कर्मचारियों पर नियंत्रण कमिश्नर के हाथ में होता है। पिछले 4 साल से चुनाव न होने के कारण, कमिश्नर ही प्रशासक के रूप में पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
77 सालों का सफर
कांग्रेस से भाजपा तक
मुंबई नगर निगम का इतिहास राजनीतिक बदलावों का गवाह रहा है,
- 1947-1967: आजादी के बाद शुरुआती 20 साल कांग्रेस का दबदबा रहा।
- 1992-2022: लगातार 30 साल तक शिवसेना का मेयर रहा (चाहे भाजपा के साथ गठबंधन में हो या अकेले)।
- 2026: अब पहली बार भाजपा अपने दम पर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसका मेयर बनना लगभग तय है।
आगे की राह
भाजपा के लिए यह जीत केवल एक नगर निगम की जीत नहीं है, बल्कि मुंबई जैसे वैश्विक शहर पर अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रमाण है। 45 साल के संघर्ष के बाद भाजपा ने वह मुकाम हासिल किया है, जहां वह शिवसेना के ‘बड़े भाई’ वाली भूमिका से आगे निकलकर नेतृत्व कर रही है। मुंबई की जनता ने इस बार ‘सत्ता परिवर्तन’ पर मुहर लगाई है।
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