Bastar Pandum 2026: छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति अब राष्ट्रीय फलक पर अपनी चमक बिखेरने को तैयार है। नई दिल्ली दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से सौजन्य मुलाकात की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति को बस्तर संभाग के सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सव ‘बस्तर पंडुम 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करना था। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की जनजातीय विरासत, परंपराओं और लोक कलाओं को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
जनजातीय अस्मिता का महाकुंभ
मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को अवगत कराया कि ‘बस्तर पंडुम’ केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा का उत्सव है। इस आयोजन के माध्यम से राज्य सरकार आदिवासी समाज की विलुप्त होती परंपराओं को संरक्षित करने और उन्हें युवा पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास कर रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस पहल की सराहना की और महोत्सव की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
तीन चरणों में होगा भव्य आयोजन
बस्तर पंडुम 2026 की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह महोत्सव बस्तर संभाग के 7 जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद पंचायतों तक फैला होगा। आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न करने के लिए इसे तीन मुख्य चरणों में बांटा गया है,
जनपद स्तर (10 से 20 जनवरी)
सबसे पहले स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की खोज होगी।
जिला स्तर (24 से 29 जनवरी)
यहाँ जनपद स्तर के विजेता अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
संभाग स्तर (1 से 5 फरवरी)
महोत्सव का भव्य समापन बस्तर मुख्यालय में होगा, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अतिथि शामिल होंगे।
क्या होगा खास?
इस वर्ष राज्य सरकार ने महोत्सव के दायरे को बढ़ाते हुए प्रतियोगिताओं की संख्या बढ़ाकर 12 कर दी है। इसमें केवल नाच-गाना ही नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन के हर पहलू को शामिल किया गया है। प्रमुख आकर्षणों में लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्रों का वादन, हस्तशिल्प (Handicraft), जनजातीय व्यंजन, पारंपरिक वेशभूषा, आदिवासी नाटक और वन-आधारित औषधीय ज्ञान का प्रदर्शन शामिल होगा। यह महोत्सव शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए बस्तर के ‘लोक जीवन’ को करीब से समझने का एक सुनहरा अवसर है।
वैश्विक मंच पर बस्तर की धमक
पिछले वर्ष इस आयोजन के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह शामिल हुए थे। इसी सफलता को दोहराते हुए इस वर्ष भी केंद्र सरकार के गृह मंत्री, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री के साथ-साथ विभिन्न देशों के राजदूतों (Ambassadors) को आमंत्रित करने की योजना है। दंतेश्वरी मंदिर परिसर से शुरू होने वाला यह महोत्सव बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती प्रदान करेगा।
विकास और कल्याण पर चर्चा
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि “विकास की राह पर चलते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखना ही हमारी प्राथमिकता है।”

