Truck Driver Inspirational Story: ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों पर ट्रक दौड़ाती पूनम की कहानी!

Truck Driver Inspirational Story: दुनिया बदल चुकी है। महिलाओं और पुरुषों में अब बराबरी की बारी है। कमाई से लेकर अधिकार तक, शिक्षा से लेकर हुनर तक सभी जगह महिलाओं और पुरुषों के लिए ये दुनिया एक जैसी है। भले ही कई लोगों को ये लगे कि अभी पूरी तरह से बदलाव नहीं हुआ है लेकिन बदलाव तो बदलाव है अगर वो positivity की एक बूंद भी लोगों तक पहुंचाए। ऐसी एक positove और प्रेरणादायी कहानी है हिमाचल के एक महिला ट्रक ड्राइवर पूनम की। 

आसान नहीं था करियर के तौर पर ड्राइवरी को चुनना

हिमाचल के किन्नौर की रहने वाली पूनम कहती हैं कि जहां वो रहती हैं वहां पर अक्सर लैंड स्लाइड की परेशानी होती रहती है। इसलिए ऊबड़-खाबड़ सड़क पर ट्रक दौड़ाते हुए भूस्खलन देखकर डर नहीं लगता है। पूनम नेगी आज नहीं बल्कि पिछले 10 साल से ट्रक चला रही हैं। उनके लिए करियर के तौर पर ट्रक ड्राइवरी चुनना थोड़ा मुश्किल था क्योंकि ट्रक और दूसरे भारी वाहन चलाते समय अक्सर उनकी टांग खिंचाई होती रहती है। लोग औरत होने की वजह से उन्हें कई बातें सुनाते और डराते रहते हैं। कई बार कुछ ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जो औरत होने के चलते उन्हें झेलनी पड़ती है। लेकिन उन्होंने जब मन बना लिया तो बना लिया। वो कहती हैं कि आखिर किसी को तो ये मानसिकता बदलनी थी इसीलिए मैंने शुरूआत कर दी। 

ऊंचे पहाड़ों के बीच ट्रक चलाना मुश्किल काम 

शिमला से किन्नौर का हाई वे सबसे ज्यादा खतरनाक हाई वे में से एक है। ऐसे में यहां पर ट्रक चालक का बेहद कुशल होना जरूरी होता है। ऐसे में पूनम नेगी इस रोड से कई बार भारी वाहन ले जा चुकी हैं। शिमला से चंबा की सुदूर पांगी घाटी तक का जोखिम भरा सफर तय कर चुकी पूनम को उनके काम  के लिए दर्जनों सम्मान भी मिल चुके हैं। उन्हें कई जगहों पर मोटिवेशनल स्पीच के लिए बुलाया भी जाता है। 

बचपन की मुश्किलों से लिया सबक 

पूनम जब स्कूल में पढ़ रही थीं तब उन्हें भारी बैग के साथ पहाड़ी पर चढ़ना उतरना बड़ा मुश्किल लगता था। तभी वो सोचती थीं काश उन्हें गाड़ी चलानी आती। पूनम अब टैक्सी का बिजनेस चलाती हैं। जब सेब का सीजन पीक पर होता है तब चंडीगढ़ से हिमाचल के बीच ट्रक में भरकर सेब ले जाती हैं। 

Positive सार 

पूनम नेगी ये साबित करती हैं कि कोई भी काम महिला और पुरुष से परे नही है। हर काम में सिर्फ कुशलता की जरूरत होती है और कौशल सीखा जा सकता है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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