मोबाइल नेटवर्क की परेशानी और दुर्गम पहाड़ों के रास्ते भी ‘जयश्री’ की इच्छाशक्ति के सामने पड़े छोटे!

हते हैं अगर हौसले बुलंद
हो तो मंज़िल दूर नहीं होती। इस बात को उत्तराखंड की जयश्री उरांव ने साबित कर
दिखाया है। जयश्री
, मसूरी से लगभग 20 किमी दूर टिहरी-गढ़वाल के बुरांस
खंडा में अपने परिवार के साथ रहती है। कोरोना महामारी के दौरान जब शिक्षा ऑनलाइन
माध्यम हो गई तब नेटवर्क की वजह से जयश्री को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पर जयश्री ने हार नहीं मानी और उन्होंने अपनी पढ़ाई को जारी रखने का माध्यम खोज
लिया।

जयश्री ने नोट्स डाउनलोड
करने के लिए रोजाना 8किमी के पहाड़ों की चढ़ाई की और घने जंगलों को पार किया पर
पढ़ाई को रुकने नहीं दिया। कड़ी मेहनत और परिश्रम का फल जयश्री को मिला और
उन्होंने अपने स्कूल में बारहवीं कक्षा की मानविकी परीक्षा में 82.6% के साथ टॉप
किया।

जयश्री ने यह साबित किया है
कि इच्छाशक्ति से इंसान सबकुछ हासिल कर सकता है। आज जयश्री लोगों के लिए एक मिसाल
हैं। जयश्री की यह सफलता गांव के और बच्चों को भी प्रेरित कर रही है।

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Dr. Kirti Sisodia

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