NISAR Satellite निसार (NISAR) यानी NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar, एक जॉइंट मिशन है जो भारत की ISRO और अमेरिका की NASA ने मिलकर तैयार किया है। ये सैटेलाइट दुनिया का पहला ऐसा रडार सैटेलाइट है जो दो अलग-अलग रडार बैंड – एल-बैंड और एस-बैंड – का यूज़ करता है। इस सैटेलाइट को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 31 जुलाई को GSLV-F16 रॉकेट के ज़रिए लॉन्च किया गया।
क्या करेगा NISAR?
- हर 12 दिन में पूरी धरती को स्कैन करेगा
- ग्लेशियर पिघलने, ज़मीन धंसने, ज्वालामुखी फटने और भूकंप जैसी घटनाओं की निगरानी करेगा
- खेतों की नमी, फसल की सेहत और बुनियादी ढांचे (जैसे ब्रिज और डैम्स) की हलचल तक पकड़ लेगा
- पर्यावरण में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को भी ट्रैक करेगा
कैसे काम करता है निसार?
निसार एक स्पेशल तकनीक, Synthetic Aperture Radar (SAR) – पर आधारित है। इसकी मदद से यह बादलों, अंधेरे और किसी भी मौसम में काम कर सकता है। यह दिन-रात धरती की निगरानी करेगा और हाई रेजोल्यूशन इमेजेज भेजेगा।
- एल-बैंड (NASA)- ज़मीन के अंदर तक झांकता है, ग्लेशियर, ज़मीन धंसना, ज्वालामुखी जैसे बदलावों को पकड़ता है।
- एस-बैंड (ISRO)- सतह की बारीक मूवमेंट को ट्रैक करता है, खेती, मिट्टी की नमी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करता है।
निसार की पावरफुल Specs
- वज़न- 2.5 टन
- कक्षा- 748 किलोमीटर की ऊंचाई पर सूर्य-समकालिक ध्रुवीय कक्षा
- कवरेज- 240 किमी का इलाका एक बार में स्कैन
- स्कैन साइकिल- हर 12 दिन
- डेटा आउटपुट- 80 टेराबाइट/दिन
- लाइफ- 3 साल
- स्टोरेज- 150 से ज्यादा हार्ड ड्राइव्स भर सकती हैं
कितनी लगी लागत?
- निसार दुनिया का सबसे महंगा अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट है।
- कुल लागत: $1.5 बिलियन (लगभग ₹13,120 करोड़)
- ISRO का हिस्सा: $93 मिलियन (₹813 करोड़)
- NASA का हिस्सा: $1.118 बिलियन (₹9779 करोड़)
क्या निसार आपदाओं से बचा सकता है?
सीधा जवाब: हां, काफी हद तक। निसार इतने सेंसीटिव डेटा इकट्ठा करेगा कि वैज्ञानिक समय रहते अलर्ट दे सकें। इससे भूकंप, भूस्खलन, ज्वालामुखी और बाढ़ जैसी आपदाओं से पहले चेतावनी संभव हो सकेगी। यानी, नुकसान को कम किया जा सकेगा।
किसानों को क्या फायदा?
- फसल की सेहत और पैदावार का अनुमान
- मिट्टी की नमी का आंकलन
- मौसम और क्लाइमेट चेंज के असर को समझना
- प्राकृतिक नुकसान का सही आकलन, ताकि मुआवज़ा तय हो सके
स्टडी में कैसे मदद करेगा?
ग्लोबल वॉर्मिंग, ग्लेशियर का मेल्टिंग रेट, समुद्री किनारों का खिसकना – ये सब धीमी प्रक्रिया होती हैं। निसार इनका रिकॉर्ड रखेगा और दुनिया को चेतावनी देगा कि हम किस तरफ बढ़ रहे हैं।
कहां से शुरू हुई निसार की कहानी?
निसार की जड़ें 1978 में NASA द्वारा लॉन्च किए गए Seasat मिशन से जुड़ी हैं। वो पहला SAR सैटेलाइट था, जो 105 दिन ही चला। लेकिन निसार, उसका evolved version है, और अब पूरी धरती को नई नजर से देखेगा।
क्यों है NISAR ज़रूरी?
निसार सिर्फ एक सैटेलाइट नहीं, ये पृथ्वी का एक डिजिटल गार्ड है जो हमें बताएगा कि धरती कैसे बदल रही है। ये विज्ञान और टेक्नोलॉजी का वो मेल है जो आने वाले समय में करोड़ों लोगों की जान और जीवन दोनों बचा सकता है।