जानें देश की पहली म्यूजिकल रोड की खासियत
Musical Road in India: मुंबई, जिसे सपनों का शहर कहा जाता है, अपनी रफ्तार और नवाचार के लिए हमेशा चर्चा में रहता है। हाल ही में मुंबई के बुनियादी ढांचे में एक ऐसा अध्याय जुड़ा है जिसने न केवल तकनीक प्रेमियों को बल्कि आम जनता को भी हैरान कर दिया है। अब मुंबई में ड्राइविंग सिर्फ एक गंतव्य तक पहुंचने का जरिया नहीं, बल्कि एक मधुर अनुभव बन गई है। कोस्टल रोड के एक विशेष हिस्से पर जैसे ही आपकी कार रफ्तार पकड़ती है, हवा में ऑस्कर विजेता गीत ‘जय हो’ की धुन गूंजने लगती है।
क्या है यह ‘म्यूजिकल रोड’?
भारत की पहली ‘म्यूजिकल रोड’ मुंबई के कोस्टल रोड प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यह तकनीक सुनने में किसी जादू जैसी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे शुद्ध विज्ञान है। जब कोई वाहन एक निश्चित गति से सड़क के एक विशेष हिस्से पर चलता है, तो सड़क की सतह और टायर के बीच होने वाला घर्षण संगीत पैदा करता है।
यह अनुभव कोस्टल रोड पर नरीमन पॉइंट से वर्ली की ओर जाने वाली नॉर्थबाउंड लेन पर तैयार किया गया है। वर्ली अंडरग्राउंड टनल से बाहर निकलते ही लगभग 500 मीटर का यह जादुई स्ट्रेच शुरू होता है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
इस सड़क को बनाने के लिए ‘रुमब्लर स्ट्रिप्स’ (Rumbler Strips) या विशेष ‘ग्रूव्स’ का उपयोग किया गया है।
- सटीक बनावट
सड़क पर निश्चित अंतराल और गहराई पर उभरी हुई धारियां (Grooves) बनाई गई हैं।
- घर्षण और कंपन
जब कार के टायर इन धारियों के ऊपर से गुजरते हैं, तो एक विशिष्ट कंपन (Vibration) पैदा होता है।
- ध्वनि तरंगें
इन कंपनों की आवृत्ति (Frequency) को इस तरह से सेट किया गया है कि वे संगीत की लहरों में बदल जाती हैं।
- रफ्तार की शर्त
इस धुन को स्पष्ट रूप से सुनने के लिए वाहन की गति 70 से 80 किमी प्रति घंटा होनी चाहिए। यदि रफ्तार कम या ज्यादा होगी, तो संगीत बेसुरा हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन 11 फरवरी 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा किया गया। इस विचार का प्रस्ताव पूर्व सांसद राहुल शेवाले ने रखा था, जिसे बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने हकीकत में बदला।
सुरक्षा और संकेतों का विशेष ध्यान
बीएमसी ने यह सुनिश्चित किया है कि ड्राइवरों को इस अनुभव का आनंद लेने के लिए कोई जोखिम न उठाना पड़े। टनल के भीतर ही 500 मीटर, 100 मीटर और 60 मीटर पहले बड़े साइनबोर्ड लगाए गए हैं। ये बोर्ड ड्राइवरों को सही लेन में रहने और गति सीमा बनाए रखने के लिए निर्देशित करते हैं।
लागत और वैश्विक चलन
इस अनूठे 500 मीटर के पैच को तैयार करने में लगभग 6.21 करोड़ रुपये की लागत आई है। हालांकि भारत के लिए यह पहला प्रयोग है, लेकिन दुनिया के अन्य हिस्सों में यह तकनीक काफी समय से मौजूद है:
- जापान- 2007 में पहली बार इसकी शुरुआत हुई।
- अन्य देश- दक्षिण कोरिया, हंगरी, अमेरिका और यूएई में भी ऐसी सड़कें मौजूद हैं।
इन सड़कों का मुख्य उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सुरक्षा भी है। ऐसी सड़कें ड्राइवरों को एक समान गति बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करती हैं और थकान या नींद आने की स्थिति में उन्हें सतर्क करती हैं।
Positive Takeaway
मुंबई की यह म्यूजिकल रोड इंजीनियरिंग और कला का एक अनूठा संगम है। यह न केवल शहर के पर्यटन आकर्षण को बढ़ाएगी बल्कि भविष्य में स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के नए रास्ते भी खोलेगी। अगली बार जब आप कोस्टल रोड से गुजरें, तो खिड़कियां चढ़ाएं, रफ्तार 70 पर रखें और भारत के गौरव ‘जय हो’ की धुन का आनंद लें।
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