Digital Arrest Protection: डिजिटल अरेस्ट से मिलेगी मुक्ति!

अब ठगों को रोकने के लिए आ रहा है ‘इमरजेंसी बटन’

Digital Arrest Protection: देश में बढ़ते साइबर अपराध, विशेष रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) के बढ़ते मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। मासूम लोगों को डरा-धमका कर उनके बैंक खातों को खाली करने वाले साइबर ठगों पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार अब एक ‘सुपर फीचर’ की तैयारी कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा गठित एक हाई-लेवल कमेटी इस दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है, जिससे ठगी का शिकार होने पर लोग अपने पैसों को एक क्लिक में सुरक्षित कर सकेंगे।

क्या है नया ‘सुपर फीचर’?

कैसे करेगा काम?

सूत्रों के अनुसार, सरकार बैंकों और UPI पेमेंट ऐप्स (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) में एक ‘इमरजेंसी बटन’ (Emergency Button) जोड़ने पर विचार कर रही है।

अक्सर डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में ठग पीड़ित को घंटों तक वीडियो कॉल पर बांधे रखते हैं और डराकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। इस नए फीचर के तहत, यदि किसी यूजर को आभास होता है कि वह धोखाधड़ी का शिकार हो रहा है, तो वह अपने मोबाइल ऐप से ही तुरंत अपने सभी बैंक खातों के वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions) को फ्रिज कर सकेगा। यह फीचर ठीक वैसा ही काम करेगा जैसे डेबिट कार्ड चोरी होने पर उसे तुरंत ब्लॉक किया जाता है, लेकिन इसकी पहुँच और गति बहुत अधिक होगी।

हाई-लेवल कमेटी कर रही है निगरानी

इस गंभीर मुद्दे से निपटने के लिए गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में एक शक्तिशाली कमेटी बनाई गई है। इसमें देश की प्रमुख एजेंसियों के विशेषज्ञ शामिल हैं:

  • NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) और दिल्ली पुलिस।
  • RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) के प्रतिनिधि।
  • I4C (इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर)।
  • IT और टेलीकॉम मंत्रालय के उच्चाधिकारी।

यह कमेटी न केवल तकनीकी समाधान खोज रही है, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने पर भी काम कर रही है ताकि साइबर ठगों के नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।

डिजिटल अरेस्ट

एक नया और खतरनाक जाल

डिजिटल अरेस्ट वर्तमान में साइबर अपराध का सबसे डरावना रूप बनकर उभरा है। इसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करते हैं। वे दावा करते हैं कि पीड़ित के नाम पर कोई अवैध पार्सल पकड़ा गया है या उनका नाम किसी मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है। इसके बाद उन्हें घंटों वीडियो कॉल पर ‘अरेस्ट’ होने का नाटक कर डराया जाता है और केस रफा-दफा करने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।

सुरक्षा के नए मापदंड

अब ठग नहीं पाएंगे ‘सक्सेस’

प्रस्तावित ‘इमरजेंसी बटन’ के लागू होने से साइबर ठगों के लिए बड़ी बाधा खड़ी हो जाएगी।

  1. त्वरित कार्रवाई: पीड़ित को बैंक जाने या कस्टमर केयर को कॉल करने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
  2. पैसों की सुरक्षा: एक बार बटन दबाते ही उस खाते से कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं हो सकेगा, जिससे ठगों तक पैसा नहीं पहुँचेगा।
  3. मनोवैज्ञानिक मजबूती: जब लोगों के पास अपने वित्तीय नियंत्रण की शक्ति होगी, तो वे डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकियों के आगे जल्दी नहीं झुकेंगे।

जागरूक रहें, सुरक्षित रहें

सरकार की यह पहल निश्चित रूप से साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक गेम-चेंजर साबित होगी। हालांकि, तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ व्यक्तिगत जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। याद रखें, कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती है और न ही आपसे पैसों की मांग करती है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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