पेट्रोल-डीज़ल का विकल्प हाइड्रोजन, जानें कैसे दुनिया भविष्य के ईंधन के रूप में कर रही है हाइड्रोजन की ओर रूख!

हाल के दिनों में बढ़ते प्रदूषण और पेट्रोलियम के विकल्प के रूप में दुनिया उन क्षेत्रों में हाइड्रोजन के इस्तेमाल की तरफ रुख कर रही है, जहां हाइड्रोजन की जगह दूसरी गैसों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ईंधन के रूप में हाइड्रोजन के कई उपयोग हैं, खाना पकाने, हवाई जहाज़ उड़ाने के लिए इस ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है।
 
वहीं पेट्रोल या कोयले से कार्बन गैस बनती है जो पर्यावरण को नुक़सान पहुंचाने का काम करती है। लेकिन हाइड्रोजन की सबसे अच्छी बात ये है कि ये जलने के बाद ऑक्सीजन और हाइड्रोजन मिल कर पानी में बदल जाते हैं और कार्बन का उत्सर्जन नहीं करते हैं।
 

हाइड्रोजन ईंधन के रूप में

ब्रिटेन की शेफ़िल्ड यूनिवर्सिटी में केमिकल इंजीनियरिंग की प्रोफ़ेसर और ब्रिटेन की संस्थाओं में हाइड्रोजन के इस्तेमाल पर रिसर्च करने वाली एक वैज्ञानिक का कहना है कि हाइड्रोजन को कई तरीक़े से जलाकर ईंधन का काम ले सकते हैं।
इन रिसर्चर के मुताबिक़, “हाइड्रोजन के जलने से भाप बनती है। हम हाइड्रोजन को किसी छोटी बॉयलर टंकी में जला सकते हैं या बड़ी फ़ैक्ट्रियों या बड़े वाहनों की टंकी में जलाने का काम कर सकते हैं। इसे वाहनों को कंबस्टन इंजन में भरकर जला सकते हैं या बैटरी के सेल में रख कर ऊर्जा पैदा कर सकते हैं।
 
हाइड्रोजन कई तरीके से बनती है, मगर ज़रूरी ये है कि उसे साफ-सुथरी तरीके से बनाया जाए। इस पर काम कर रहे एक और वैज्ञानिक का कहना है कि “हाइड्रोजन धरती पर प्राकृतिक रूप से नहीं मिलते हैं लेकिन पानी, हाइड्रोकार्बन के रूप में कोयले और गैस और तेल में जरूर मिलते हैं। हाइड्रोकार्बन स्रोत यानि प्राकृतिक गैस से हाइड्रोजन निकालने की प्रक्रिया को स्टीम मीथेन रिफ़ॉर्मिंग के तौर पर भी जाना जाता है। दुनियाभर में इसका इस्तेमाल हो रहा है और हर साल 12 करोड़ टन हाइड्रोजन इसी तरीके से बनाया जा रहा है।
 

हाइड्रोजन बनाने की ग्रीन प्रक्रिया

हाइड्रोजन बनाने की सबसे बेहतरीन प्रक्रिया है ग्रीन प्रक्रिया इसे इलेक्ट्रोलिसिस यानि पानी से हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया भी कहते हैं।
 
इन शोधकर्ताओं का ये भी कहना है कि यातायात साधनों पर बड़े पैमाने पर ऊर्जा खर्च होती है और यह कार्बन उत्सर्जन का एक बड़ा स्रोत भी है।
 
अगर बात करें सड़कों पर बिजली से चलने वाली गाड़ियों की ये लिथियम बैटरी पर चलती हैं। मगर बड़े ट्रक, ट्रेन और नौकाओं को चलाने के लिए बैटरी की क्षमता पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। इन साधनों को चलाने में भी हाइड्रोजन का 
उपयोग किया जा सकता है।
 
फिलहाल तो इन बातों को ही देखकर निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है लेकिन दुनिया में यातायात साधनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन का 2-3% हिस्सा बड़ी मालवाहक पोतों से हो रहा है। इन नौकाओं में अमोनिया यानी नाइट्रोजन और 
हाइड्रोजन को ईंधन की तरह इस्तेमाल करने से कार्बन उत्सर्जन में कमी कर सकते हैं।
 
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Dr. Kirti Sisodia

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