बायो-फ्यूल ‘भविष्य का ईंधन’
यह एग्री प्रोडक्ट होता है। इसके जलने से भरपूर मात्रा में ऊर्जा जनरेट होती है। जिसे बायो-फ्यूल कहा जाता है। विभिन्न प्रकार की फसलों तथा पौधों से बायो-फ्यूल बनाए जा सकते हैं। इथेनॉल गैसोलीन का ऑप्शन है। यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करता है। इथेनॉल को लैंडफिल गैसों और नगरपालिका ठोस कचरे के साथ-साथ एग्रीकल्चर वेस्ट, पशु खाद, फूड वेस्ट, फैट, ऑइल और ग्रीस से भी बनाया जा सकता है।
सस्ते ईंधन की ओर देख रही है दुनिया
इस क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि ये पेट्रोल-डीजल के विकल्प के रूप में स्थापित होगा। साथ ही ये काफी सस्ता भी होगा। सरकार इस दिशा में काम कर रही है कि बड़े पैमाने पर गाड़ियों के ऐसे इंजन के निर्माण का काम हो, जो पूरी तरह बायो एथनॉल पर ही चले। गाड़ियों के सस्ते ईंधन का ये फॉर्मूला आने वाले समय में काफी कारगर साबित होगा।
किसानों को मिलेगा फायदा
सरकार ने कार निर्माता कंपनियों को 100 फीसदी बायो एथेनॉल से चलने वाले इंजन बनाने के निर्देश दिए हैं। ये कहा जा रहा है कि 100 फीसदी वायो एथेनॉल चलने वाली गाड़ियों के आने के बाद एथेनॉल की मांग बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ किसानों को होगा, सरकार की योजना।