फैमिली कम्यूनिकेशन है सबसे बेहतर दवा, फैमिली टॉक से सुधरते हैं रिश्ते और स्वास्थ्य दोनों- रिसर्च

हाल के सालों में युवाओं के डिप्रेशन पर काफी चर्चा हुई हैं। बिजी लाइफस्टाइल, गैजेट्स, काम और पढ़ाई का तनाव और परिवार से दूर रहने को इन सबका कारण माना गया है। इन सभी बातों पर हार्वर्ड के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन में एक रिसर्च किया जा रहा है जिसके मुताबिक “ सिर्फ युवा ही नहीं बल्कि माता-पिता भी अवसाद से घिरे होते हैं।

दिसंबर 2022 में एक संस्था ने 750 पैरेंट्स के सर्वे में ये दावा किया था कि एक तिहाई किशोरों के पैरेंट्स तनाव महसूस करते हैं। स्टडी में दावा किया है कि अवसादग्रस्त माता-पिता के बच्चों में व्यवहार संबंधी, तनाव से निपटने, लोगों से जुड़ने, शैक्षणिक समस्या व मानसिक बीमारी की दर कहीं ज्यादा है।

यानी कि पैरेंट्स-बच्चे दोनों ही पीड़ित और परेशान हैं, तो समस्या बढ़ जाती है। इसलिए पैरेंट्स की मानसिक सेहत पर भी ध्यान देना एक जरूरी बात है। इसी स्टडी में इससे निपटने के बारे में भी कुछ बातें कही गई हैं…

बच्चों की बात सुने

स्टडी में 40% युवाओं का कहना है कि कि माता-पिता उनकी जिंदगी के बारे में चर्चा नहीं करते हैं। उनकी प्रतिक्रिया को माता-पिता भी जानें। इसे ही ‘फैमिली टॉक’ पहल के रूप में देखा गया है। इससे किशोरों को भावनात्मक समर्थन के लिए पैरेंट्स के पास जाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। जो मजबूत रिश्ते का संकेत देते हैं।


माता-पिता ले सकते हैं दूसरों से मदद

एक्सपर्ट का मानना है कि – मानसिक स्वास्थ्य विकारों से निपटने के लिए उनकी समझ होना सबसे पहला स्टेप है। युवा जब चिंतित या उदास होते हैं तो पैरेंट्स को शांतिपूर्ण, प्रभावी मदद देने और अपनी चिंता को प्रबंधित करने में सहयोग की जरूरत हो सकती है। अवसाद-चिंता का इलाज संभव है, इसके लिए कभी मदद लेनी पड़े तो परहेज बिल्कुल भी न करें।


देखभाल करने वालों का रखें ख्याल

माता-पिता को भी मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की जरूरत होती है। इस रिसर्च के मुताबिक स्वास्थ्य केंद्रों, कार्यस्थलों व सामुदायिक संस्थानों के जरिए माता-पिता के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने से पूरे परिवार को फायदा हो सकता है। माता-पिता चाहे उदास हों या नहीं, हर स्थिति में बड़ी भूमिका निभाते हैं।


ईमानदारी से करें चर्चा

अवसादग्रस्त पैरेंट्स के किशोर उनके व्यवहार के लिए कई बार खुद को दोषी मानते हैं। इसलिए पैरेंट्स को सीखना चाहिए कि बच्चों से बात करते वक्त अपने अनुभवों को लेकर वे पूरी तरह से ईमानदार रहें।


उद्देश्यों को करें तय

रिसर्च में 26% किशोरों ने माना कि जीवन में उन्हें उद्देश्य महसूस नहीं हुआ, जबकि अवसाद से इसका सीधा संबंध होता है। बच्चों का जीवन अर्थपूर्ण बनाने में पैरेंट्स को मदद करनी चाहिए ताकि उनका समग्र रूप से कल्याण हो।

Avatar photo

Dr. Kirti Sisodia

Content Writer

ALSO READ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Owner/Editor In Chief: Dr.Kirti Sisodia 

Office Address: D 133, near Ram Janki Temple, Sector 5, Jagriti Nagar, Devendra Nagar, Raipur, Chhattisgarh 492001

Mob. – 6232190022

Email – Hello@seepositive.in

FOLLOW US​

GET OUR POSITIVE STORIES

Uplifting stories, positive impact and updates delivered straight into your inbox.