Holi eye care: होली पर इस्तेमाल होने वाले आधुनिक सिंथेटिक रंगों में खतरनाक केमिकल्स, भारी धातुएं और कभी-कभी कांच के बारीक कण तक मौजूद होते हैं। ये तत्व आंखों के संपर्क में आते ही जलन, खुजली और गंभीर स्थिति में ‘कंजंक्टिवाइटिस’ (Conjunctivitis) का कारण बन सकते हैं। आंखों की बाहरी परत बहुत ही कोमल और संवेदनशील होती है, इसलिए थोड़े से भी केमिकल एक्सपोजर से कॉर्निया पर खरोंच आ सकती है।
सिंथेटिक रंगों का आंखों पर प्रभाव
बाजार में बिकने वाले सूखे गुलाल और वाटर कलर दोनों ही आंखों के लिए जोखिम भरे हैं। सिंथेटिक पिगमेंट कॉर्निया की सतह को प्रभावित करते हैं। जब रंग आंखों में चला जाता है, तो हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रिया उसे रगड़ने की होती है, जो सबसे बड़ी गलती है। रगड़ने से रंग के कण आंखों के अंदर रगड़ पैदा करते हैं, जिससे लालिमा, सूजन और धुंधला दिखने जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले सावधान
यदि आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, तो होली के दिन इन्हें पूरी तरह से टालना ही बेहतर है। लेंस और आंखों की सतह के बीच रंग के कण फंस सकते हैं, जिससे संक्रमण (Infection) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। होली के दिन लेंस की जगह पुराने चश्मे का उपयोग करें।
डॉक्टर की विशेष सलाह
- अपनी आंखों को सुरक्षित रखने के लिए इन 6 मंत्रों का पालन जरूर करें,
- प्रोटेक्टिव आई ग्लासेस पहनें- होली खेलते समय सनग्लासेस या बड़े फ्रेम वाले चश्मे पहनना न केवल स्टाइलिश है, बल्कि यह रंगों के सीधे प्रहार से आंखों को बचाता है।
- आंखों को कभी न रगड़ें- आंखों में रंग जाने पर खुजली होना स्वाभाविक है, लेकिन रगड़ने से कॉर्निया पर ‘एब्रेशन’ (खरोंच) आ सकती है।
- साफ पानी का उपयोग- रंग जाने पर तुरंत अपनी आंखों को 10 से 15 मिनट तक ठंडे और साफ पानी के छींटों से धोएं। इससे केमिकल का असर कम हो जाता है।
- नेचुरल रंगों का चुनाव- हमेशा ऑर्गेनिक या हर्बल रंगों का ही उपयोग करें। ये प्राकृतिक तत्वों से बने होते हैं और आंखों के लिए कम हानिकारक होते हैं।
- त्वचा पर मॉइस्चराइजर लगाएं- आंखों के आसपास नारियल तेल या कोल्ड क्रीम की एक मोटी परत लगाएं। इससे रंग त्वचा पर नहीं चिपकेगा और धोते समय आंखों के अंदर नहीं जाएगा।
- डॉक्टर से परामर्श लें- यदि पानी से धोने के बाद भी जलन, दर्द या धुंधलापन बना रहे, तो बिना देर किए आई स्पेशलिस्ट से संपर्क करें। खुद से कोई भी आई ड्रॉप न डालें।
अतिरिक्त देखभाल की जरूरत
बच्चों की आंखें वयस्कों की तुलना में बहुत अधिक नाजुक होती हैं। उन्हें हमेशा गुब्बारों और पिचकारी के सीधे प्रहार से बचने की शिक्षा दें। वहीं, बुजुर्गों में अक्सर ‘ड्राई आई’ या मोतियाबिंद जैसी समस्याएं पहले से हो सकती हैं, इसलिए उनकी आंखों में रंग जाना अधिक कष्टकारी हो सकता है।
होली खुशियों का त्योहार है, इसे सावधानी के साथ मनाएं। सही सुरक्षात्मक कदम उठाकर आप न केवल रंगों का आनंद ले सकते हैं, बल्कि अपनी आंखों की रोशनी को भी सुरक्षित रख सकते हैं।

