Stop Child Marriage Campaign: बाल विवाह मुक्त होता राज्य!

Stop Child Marriage Campaign

बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़

MCB जिले में प्रशासन की सतर्कता से थमा दो नाबालिगों का विवाह

Stop Child Marriage Campaign: छत्तीसगढ़ में ‘बाल विवाह मुक्त अभियान’ केवल एक सरकारी नारा नहीं, बल्कि धरातल पर एक मजबूत बदलाव की लहर बनता जा रहा है। हाल ही में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और सजगता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि कानून और समाज मिलकर खड़े हों, तो बच्चों का बचपन सुरक्षित किया जा सकता है।

क्या है पूरा मामला?

25 फरवरी 2026 की तारीख मनेन्द्रगढ़ के दो गाँवों, ग्राम पंचायत दुग्गी और मुकुंदपुर (विकासखंड खड़गवां) के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को गुप्त सूचना मिली कि इन क्षेत्रों में दो नाबालिग बालिकाओं और एक नाबालिग बालक का विवाह संपन्न कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया, क्योंकि मामला सीधे तौर पर बच्चों के अधिकारों के हनन का था।

मिली जानकारी के अनुसार, दोनों बालिकाओं की आयु क्रमशः 16 वर्ष 6 माह और 17 वर्ष 6 माह थी, जबकि दूल्हा बनने जा रहे बालक की आयु महज 18 वर्ष 6 माह पाई गई। भारतीय कानून के अनुसार विवाह के लिए लड़की की आयु कम से कम 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष होनी अनिवार्य है।

प्रशासन की ‘स्ट्राइक’ टीम और कार्रवाई

जिला कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के कड़े निर्देशों और जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में तत्काल एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस टीम का नेतृत्व जिला बाल संरक्षण अधिकारी सुश्री कोमल सिंह ने किया।

इस विशेष रेस्क्यू टीम में शामिल थे

  • संस्थागत देखरेख संरक्षण अधिकारी
  • परियोजना अधिकारी (खड़गवां)
  • चाइल्ड हेल्पलाइन प्रतिनिधि और पुलिस इकाई
  • स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सेक्टर सुपरवाइजर

मौके पर समझाइश और सख्त रुख

खड़गवां तहसीलदार की मौजूदगी में जब यह टीम विवाह स्थल पर पहुँची, तो वहां उत्सव का माहौल था। प्रशासन ने बेहद संवेदनशीलता लेकिन मजबूती के साथ परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के कानूनी प्रावधानों और दंडात्मक कार्रवाई के बारे में विस्तार से समझाया।

अधिकारियों ने न केवल कानून का डर दिखाया, बल्कि परिजनों को यह भी समझाया कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चियों के स्वास्थ्य पर क्या गंभीर प्रभाव पड़ते हैं और यह किस तरह उनके मानसिक विकास को रोकता है। प्रशासन की समझाइश और सख्त रुख का असर यह हुआ कि परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार की और मौके पर ही सजा हुआ मंडप हटवा दिया गया।

बाल संरक्षण की मिसाल

यह कोई इकलौती घटना नहीं है। जिले में पिछले कुछ ही दिनों के भीतर जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन टीम द्वारा कुल छह बाल विवाह रोके जा चुके हैं। यह आंकड़े जिला प्रशासन की सक्रियता और ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

प्रशासन की इस मुस्तैदी ने न केवल तीन बच्चों के भविष्य को अंधकार में जाने से बचाया, बल्कि पूरे समाज को यह कड़ा संदेश दिया है कि बाल विवाह एक सामाजिक अपराध है जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

आम नागरिक कैसे करें सहयोग?

जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे इस कुप्रथा को जड़ से मिटाने में ‘जागरूक प्रहरी’ की भूमिका निभाएं। यदि आपके आसपास कहीं भी बाल विवाह की तैयारी हो रही हो या इसकी सूचना मिले, तो बिना डरे चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर कॉल करें। आपकी एक छोटी सी सूचना किसी बच्चे की पूरी जिंदगी संवार सकती है।

Positive Takeaway

बाल विवाह जैसी रूढ़िवादी परंपराओं को केवल कानून से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता से ही खत्म किया जा सकता है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की यह सफलता छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा है। जब प्रशासन और जनता एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तभी सही मायनों में ‘नवा छत्तीसगढ़’ का सपना साकार होता है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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