Millets Mahotsav 2026: पोषण और समृद्धि की दिशा में नई पहल!

Millets Mahotsav 2026: छत्तीसगढ़ में कृषि और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। जिले के इतिहास में पहली बार आयोजित होने वाला “मिलेट्स महोत्सव” न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारेगा, बल्कि आम नागरिकों को बेहतर पोषण के प्रति जागरूक भी करेगा। कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा की इस अभिनव पहल का मुख्य उद्देश्य ‘श्रीअन्न’ यानी मिलेट्स को जन-आंदोलन का रूप देना है।

यह ऐतिहासिक आयोजन 5 जनवरी 2026 को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित किया जा रहा है, जो जिले की आत्मनिर्भरता और स्वस्थ समाज की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

श्रीअन्न क्यों है भविष्य का भोजन?

मिलेट्स, जिन्हें हम कोदो, कुटकी और रागी के नाम से जानते हैं, केवल अनाज नहीं बल्कि ‘सुपरफूड’ हैं। वर्तमान समय में जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ रही हैं, तब मिलेट्स एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करते हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन पाया जाता है।

‘मिलेट मैन ऑफ इंडिया’ भी होंगे हिस्सा

इस महोत्सव की गरिमा को बढ़ाने के लिए ‘मिलेट मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध पद्मश्री डॉ. खादर वल्ली विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। डॉ. वल्ली मिलेट्स के औषधीय गुणों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वे इस महोत्सव में बताएंगे कि कैसे कोदो-कुटकी का नियमित सेवन मधुमेह (Diabetes), हृदय रोग और पाचन संबंधी समस्याओं को जड़ से खत्म करने में मदद कर सकता है। उनका मार्गदर्शन जिले के किसानों के लिए वैज्ञानिक खेती और अंतरराष्ट्रीय विपणन (Marketing) के नए रास्ते खोलेगा।

स्वाद और स्वास्थ्य का संगम

मिलेट्स महोत्सव केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक उत्सव होगा जहाँ ‘खेत से थाली तक’ के सफर को प्रदर्शित किया जाएगा,

व्यंजनों की प्रदर्शनी

यहाँ महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए मिलेट्स के पारंपरिक और आधुनिक व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। रागी के लड्डू, कोदो की खीर और कुटकी के पुलाव जैसे स्वादिष्ट पकवान लोगों को यह अहसास कराएंगे कि स्वास्थ्यवर्धक भोजन भी अत्यंत जायकेदार हो सकता है।

किसान संवाद

जिले के प्रगतिशील किसानों को एक मंच मिलेगा जहाँ वे अपनी सफल कहानियाँ साझा करेंगे और विशेषज्ञों से खेती की नई तकनीकें सीखेंगे।

पोषण सुरक्षा

आम नागरिकों को बताया जाएगा कि कैसे कम लागत में वे अपने परिवार को बेहतर पोषण दे सकते हैं।

कम लागत, अधिक मुनाफ

मिलेट्स की खेती पर्यावरण और किसान दोनों के लिए अनुकूल है। कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने जोर देकर कहा है कि मिलेट्स कम पानी में उगने वाली और जलवायु परिवर्तन को सहने वाली फसलें हैं। इससे किसानों की सिंचाई लागत कम होती है और उन्हें सूखे जैसी स्थिति में भी फसल का आश्वासन मिलता है। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि मिलेट्स के माध्यम से किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो और जिले को एक विशेष कृषि पहचान मिले।

जन-भागीदारी से बनेगा जन-आंदोलन

कलेक्टर ने जिले के युवाओं, महिला समूहों और आमजन से अपील की है कि वे इस महोत्सव का हिस्सा बनें। जब तक मिलेट्स हमारे दैनिक आहार का हिस्सा नहीं बनेगा, तब तक पूर्ण पोषण सुरक्षा का लक्ष्य प्राप्त करना कठिन है। 5 जनवरी का यह कार्यक्रम जिले को सशक्त, स्वस्थ और समृद्ध बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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Rishita Diwan

Content Writer

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